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Akshat Puja: पूजा में क्यों चढ़ाया जाता है अक्षत, जानिए अक्षत का महत्व

जीवांजलि धार्मिक डेस्कPublished by:
कोमल
सार

Akshat Puja: हिंदू धर्म में चावल या अक्षत का विशेष महत्व है। पूजा में देवताओं को अक्षत चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज तक चली आ रही है। मान्यता है कि अक्षत के बिना की गई पूजा अधूरी होती है।

अक्षत का क्या है महत्व
Akshat Puja: हिंदू धर्म में चावल या अक्षत का विशेष महत्व है। पूजा में देवताओं को अक्षत चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज तक चली आ रही है। मान्यता है कि अक्षत के बिना की गई पूजा अधूरी होती है अक्षत का अर्थ है जो टूटा हुआ न हो। शास्त्रों में अन्न और हवन का विशेष महत्व माना गया है। हिंदू पुराणों में पूजा के दौरान चावल या अक्षत चढ़ाने का उल्लेख मिलता है, जिसे शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। अलग-अलग धर्मों के लोग अपने भगवान या इष्ट देव की पूजा भी अलग-अलग विधि-विधान से करते हैं। मान्यता है कि अन्न से किए गए हवन से भगवान संतुष्ट होते हैं। साथ ही यह भी माना जाता है कि भगवान को भोजन अर्पित करने से पितर भी संतुष्ट होते हैं। वहीं भगवान को हमेशा ऐसे अक्षत चढ़ाए जाते हैं, जो टूटे हुए न हों। आइए आज हम आपको बताते हैं पूजा में अक्षत का क्या महत्व है।

पूजा में क्यों चढ़ाए जाते हैं अक्षत Pooja Mein Kyon Chadhae Jaate Hain Akshat

शास्त्रों में चावल को सबसे अच्छा अन्न बताया गया है। इसी वजह से पूजा में अक्षत चढ़ाना सबसे अच्छा होता है।

जब हम पूजा करते हैं तो भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हमारे जीवन में सुख-शांति बनी रहे। चावल का रंग सफेद होने के कारण इसे शांति का प्रतीक माना जाता है। चावल को सबसे शुद्ध अनाज माना जाता है। पूजा में किसी भी देवता को साफ चीजें ही चढ़ानी चाहिए। चावल धान के अंदर उगता है और इसे पशु-पक्षी भी खराब नहीं कर सकते, इसलिए इसे पूजा में चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है।

पूजा से पहले हम जो भी संकल्प लेते हैं, उसमें हम प्रार्थना करते हैं कि हमें जीवन में सफलता मिले और समस्याओं का सामना करने का साहस मिले। क्योंकि अक्षत का अर्थ होता है जो टूटा हुआ न हो, इसलिए यह एकाग्रता का भी सूचक है।


 

पूजा में किस तरह का अक्षत चढ़ाना चाहिए Pooja Mein Kis Tarah Ka Akshat Chadhaana Chaahie

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी पूजा में अक्षत चढ़ाते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि अक्षत टूटे हुए न हों। मान्यता है कि देवी-देवताओं को टूटे हुए अक्षत नहीं चढ़ाने चाहिए। टूटे हुए अक्षत चढ़ाने से देवी-देवता नाराज हो जाते हैं। इसलिए पूजा में हमेशा साफ और सफेद चावल ही चढ़ाना चाहिए।

किस देवता को नहीं चढ़ाया जाता है अक्षत ? Kis Devata Ko Nahin Chadhaaya Jaata Hai Akshat  ?

चावल को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। लेकिन फिर भी भगवान विष्णु की पूजा में कभी भी चावल नहीं चढ़ाया जाता। वहीं शालिग्राम की पूजा करते समय चावल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा में चावल का इस्तेमाल करने से व्यक्ति पर पाप लगता है। पंडितों के अनुसार अगर आप भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा कर रहे हैं तो सफेद चावल पर कुमकुम लगाकर पूजा कर सकते हैं। वहीं हनुमान जी को कभी भी चावल नहीं चढ़ाया जाता है। भोलेनाथ की पूजा में अक्षत का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन याद रखें भगवान शिव की पूजा करते समय कभी भी हल्दी या कुमकुल वाले चावल का इस्तेमाल न करें। भगवान शिव की पूजा में कभी भी रंगीन चावल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

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