
शास्त्रों में चावल को सबसे अच्छा अन्न बताया गया है। इसी वजह से पूजा में अक्षत चढ़ाना सबसे अच्छा होता है।
जब हम पूजा करते हैं तो भगवान से प्रार्थना करते हैं कि हमारे जीवन में सुख-शांति बनी रहे। चावल का रंग सफेद होने के कारण इसे शांति का प्रतीक माना जाता है। चावल को सबसे शुद्ध अनाज माना जाता है। पूजा में किसी भी देवता को साफ चीजें ही चढ़ानी चाहिए। चावल धान के अंदर उगता है और इसे पशु-पक्षी भी खराब नहीं कर सकते, इसलिए इसे पूजा में चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी भी पूजा में अक्षत चढ़ाते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि अक्षत टूटे हुए न हों। मान्यता है कि देवी-देवताओं को टूटे हुए अक्षत नहीं चढ़ाने चाहिए। टूटे हुए अक्षत चढ़ाने से देवी-देवता नाराज हो जाते हैं। इसलिए पूजा में हमेशा साफ और सफेद चावल ही चढ़ाना चाहिए।
चावल को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। लेकिन फिर भी भगवान विष्णु की पूजा में कभी भी चावल नहीं चढ़ाया जाता। वहीं शालिग्राम की पूजा करते समय चावल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा में चावल का इस्तेमाल करने से व्यक्ति पर पाप लगता है। पंडितों के अनुसार अगर आप भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा कर रहे हैं तो सफेद चावल पर कुमकुम लगाकर पूजा कर सकते हैं। वहीं हनुमान जी को कभी भी चावल नहीं चढ़ाया जाता है। भोलेनाथ की पूजा में अक्षत का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन याद रखें भगवान शिव की पूजा करते समय कभी भी हल्दी या कुमकुल वाले चावल का इस्तेमाल न करें। भगवान शिव की पूजा में कभी भी रंगीन चावल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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