Worshipping Trees:हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जिसमें हर त्योहार को अलग-अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। इसके बारे में जितना जानें, उतना कम है। आपको हर बार कुछ नया जानने को मिलेगा। यह एक ऐसा धर्म है जिसके बारे में जानने के लिए विदेशों से भी लोग खिंचे चले आते हैं। आपको बता दें कि हिंदू धर्म में कई पेड़-पौधों की पूजा की जाती है।
हिन्दु धर्म में मु्ख्य रूप से की जाती है इन पेड़ो की पूजा
पीपल
श्रीमद्भागवत गीता में भी भगवान कृष्ण ने पीपल को अपना ही स्वरूप बताया है। इसे 'अश्वत्थ' कहा जाता है। यही वजह है कि भगवान की मूर्ति की पूजा या मंदिर जाने के अभाव में पीपल की पूजा दरिद्रता दूर करने और सुख-समृद्धि और धन की कामना पूरी करने वाली मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार अगर आपको कोई दर्द या कोई बीमारी है तो सुबह पीपल की पूजा करने से आपको लाभ मिलेगा। पीपल को भी अमृत के समान माना जाता है। साथ ही यह सबसे ज्यादा ऑक्सीजन छोड़ने वाले पेड़ों में से एक है।
आम
आमतौर पर हिंदू धर्म में पूजा के लिए इसके पत्तों का इस्तेमाल किया जाता है। जब भी आपके घर में कोई शुभ कार्य होता है तो इसे घर के दरवाजे पर या घर में पूजा के समय कलश में रखा जाता है। मान्यता है कि इसका प्रयोग करने से यह नकारात्मकता को सोख लेता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। साथ ही यह कई बीमारियों से भी बचाता है।
वट
वट जिसे बरगद भी कहते हैं। वट सावित्री के दिन इस वृक्ष की पूजा की जाती है। पीपल के बाद इसका महत्व सबसे अधिक माना जाता है। इस वृक्ष में भगवान शिव विराजमान हैं। मान्यता है कि इसकी पूजा करना भगवान की पूजा और दर्शन के बराबर है। साथ ही शास्त्रों के अनुसार इसे 5 वट वृक्षों में से एक माना गया है। जो इस प्रकार हैं। प्रयाग में अक्षयवट, नासिक में पंचवट, वृंदावन में वंशीवट, गया में गयावट और उज्जैन में पवित्र सिद्धवट।
नारियल
हिंदू धर्म में इसे अधिक महत्व दिया जाता है। जब हमारे घर में कोई भी शुभ कार्य होता है तो इसे जल से भरे कलश में रखा जाता है। साथ ही इसे प्रसाद के रूप में देवी-देवताओं को चढ़ाया जाता है। इसे मंगल का प्रतीक माना जाता है। जिसके कारण हिंदू धर्म में इसका अधिक महत्व है। साथ ही इसका सेवन करने से आप कई बीमारियों से भी बच सकते हैं।
बिल्व
भगवान शिव की पूजा करते समय इस पेड़ को मुख्य पेड़ माना जाता है, इसके पत्ते चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा आप पर हमेशा बनी रहती है। इस वृक्ष के बारे में हिंदू पुराणों में बताया गया है कि एक बार देवी पार्वती ने अपने माथे से पसीना पोंछकर फेंक दिया था, जिसकी कुछ बूंदें मंदार पर्वत पर गिरीं, जिससे बेल वृक्ष उत्पन्न हुआ।
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