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Ma Kalratri: नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की इस विधि से करें पूजा, जानें पूजा मंत्र और पूजा विधि

jeevanjali Published by: कोमल Updated Sun, 14 Apr 2024 02:57 PM IST
सार

Ma Kalratri: नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं। मां कालरात्रि का नाम "काल" यानी "समय" और "रात्रि" यानी "रात" से मिलकर बना है। मां कालरात्रि को रात की देवी माना जाता है।

नवरात्रि 2024
नवरात्रि 2024- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Ma Kalratri: नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप हैं। मां कालरात्रि का नाम "काल" यानी "समय" और "रात्रि" यानी "रात" से मिलकर बना है। मां कालरात्रि को रात की देवी माना जाता है। मां कालरात्रि का स्वरूप भयंकर है। मां कालरात्रि का रंग काला है। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं। उनके हाथों में तलवार, खड्ग, त्रिशूल और वरदान मुद्रा है। मां कालरात्रि घोड़े पर सवार हैं। मां कालरात्रि को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को शक्ति, साहस, और बुद्धि प्राप्त होती है। मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें मनोवांछित फल प्राप्त होता है। मां कालरात्रि को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को शक्ति, साहस, और बुद्धि प्राप्त होती है। मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

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माँ कालरात्रि देवी की एक पौराणिक कथा है 

एक बार राक्षस रक्तबीज का आतंक बढ़ गया था। रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने कालरात्रि का रूप धारण किया।जब रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने कालरात्रि का रूप धारण किया तो उस समय देवी का रंग भयंकर काला हो गया। देवी के मुख से भयंकर ज्वाला निकलने लगी।रक्तबीज देवी दुर्गा से युद्ध करने के लिए आगे बढ़ा। जैसे ही रक्तबीज देवी के सामने आया, देवी ने उसे अपनी तलवार से वार किया।रक्तबीज के शरीर से रक्त की बूंदें जमीन पर गिरते ही उन बूंदों से नए-नए रक्तबीज पैदा होने लगे। देवी कालरात्रि ने अपनी शक्तियों से उन सभी रक्तबीजों को मार डाला।जब रक्तबीज का अंत हो गया तो देवी कालरात्रि शांत हो गईं।

मां कालरात्रि को शक्ति और साहस की देवी माना जाता है। मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को शक्ति, साहस, और बुद्धि प्राप्त होती है। मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें मनोवांछित फल प्राप्त होता है।
 
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मां कालरात्रि का मंत्र

ॐ कालरात्र्यै नम:।

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि।

जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोस्तुते॥

ॐ ऐं सर्वाप्रशमनं त्रैलोक्यस्या अखिलेश्वरी।

एवमेव त्वथा कार्यस्मद् वैरिविनाशनम् नमो सें ऐं ॐ।।

मां कालरात्रि की पूजा विधि:

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को साफ करें और मां कालरात्रि की प्रतिमा स्थापित करें।
मां कालरात्रि को नीले रंग का वस्त्र, नीले फूल, फल, मिठाई, और सुगंधित धूप-दीप अर्पित करें।
मां कालरात्रि का षोडशोपचार पूजन करें।
मां कालरात्रि के बीज मंत्र का जाप करें:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै नमः
मां कालरात्रि की आरती करें।
प्रसाद वितरित करें।
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को कई लाभ होते ह जैसे लाभ प्राप्त होते हैं:
-शक्ति और साहस में वृद्धि
-बुद्धि और विद्या की प्राप्ति
-कष्टों का निवारण
-मनोवांछित फल की प्राप्ति

नवरात्रि के सातवे दिन करें ये उपाय 

नवरात्रि में सप्तमी तिथि के दिन संध्या के समय आप अपने बायें हाथ में पाँच काली मिर्च लें और उसे सिर से पैर तक पाँच बार फेरें, तत्पश्चात अपने छत पर या बाहर जाकर एक काली मिर्च को दाहिने, एक को बायें, एक को सामने की तरफ, एक काली मिर्च को पीछे की तरफ तथा आखिरी काली मिर्च को ऊपर की तरफ फेक दें, उसके बाद बिना पीछे देखें अपने घर आयें और हाथ पैर धुल लें। ऐसा करने से आपके जीवन की सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होंगी तथा आपको अपने कार्यों में सफलता मिलेगी।

नवरात्रि के सप्तमी तिथि को संध्या प्रहर में पाँच लौंग, पाँच काली मिर्च लेकर अपने शत्रु का 21 बार नाम लेकर उस पर फूँक मार दें, अगले दिन इनको जला दें। इस उपाय को करने से शत्रु आपको पराजित नही कर पायेंगे

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा विधि का पालन करके भक्त मां कालरात्रि की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

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