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Skandmata Aarti Lyrics: नवरात्रि के पांचवें दिन करें मां स्कंदमाता की आरती, जीवन में आएंगी खुशियां

jeevanjali Published by: निधि Updated Fri, 12 Apr 2024 07:14 PM IST
सार

Navratri 2024 5th Day: 13 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में स्कंदमाता को मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता के रूप में पूजा जाता है।

Navratri 2024 5th Day: 13 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि
Navratri 2024 5th Day: 13 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि- फोटो : JEEVANJALI

विस्तार

Navratri 2024 5th Day: 13 अप्रैल को चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में स्कंदमाता को मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता के रूप में पूजा जाता है। कहा जाता है कि स्कंदमाता भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। स्कंदमाता का स्वरूप मनोरम है। उनकी चार भुजाएं हैं, जिसके कारण वह दो हाथों में कमल का फूल लिए हुए प्रतीत होती हैं। स्कंदजी एक हाथ से बाल रूप में बैठे हैं। दूसरी ओर से माता ने बाण पकड़ रखा है। मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में खुशियां आती हैं। संतान प्राप्ति के लिए स्कंदमाता की पूजा और आरती करना लाभकारी माना जाता है। स्कंदमाता की पूजा से भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनकी आराधना भक्त को अलौकिक तेज और कांतिमय बना देती है। यहां की जा रही है स्कंदमाता की आरती-
 
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स्कंदमाता की आरती 

जय तेरी हो स्कंद माता।
पांचवां नाम तुम्हारा आता॥

सबके मन की जानन हारी।
जग जननी सबकी महतारी॥

तेरी जोत जलाता रहू मैं।
हरदम तुझे ध्याता रहू मै॥

कई नामों से तुझे पुकारा।
मुझे एक है तेरा सहारा॥

कही पहाडो पर है डेरा।
कई शहरों में तेरा बसेरा॥

हर मंदिर में तेरे नजारे।
गुण गाए तेरे भक्त प्यारे॥

भक्ति अपनी मुझे दिला दो।
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो॥

इंद्र आदि देवता मिल सारे।
करे पुकार तुम्हारे द्वारे॥

दुष्ट दैत्य जब चढ़ कर आए।
तू ही खंडा हाथ उठाए॥

दासों को सदा बचाने आयी।
भक्त की आस पुजाने आयी॥

स्कंदमाता का मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
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