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Maa Saraswati: मां सरस्वती ने क्यों दिया माता लक्ष्मी और गंगा को श्राप जानिए पौराणिक कथा

jeevanjali Published by: कोमल Updated Fri, 29 Dec 2023 08:09 AM IST
सार

Maa Saraswati: मां सरस्वती माता लक्ष्मी और गंगा ये तीनों ही देवी विष्णु भगवान की तीन पत्नियां थी तीनों सदा नारायण को प्रसन्न रखने का प्रयास करती रहती थी, ताकि विष्णु भगवान का विशेष प्रेम उन्हें प्राप्त हो सके।

मां सरस्वती
मां सरस्वती- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Maa Saraswati: मां सरस्वती माता लक्ष्मी और गंगा ये तीनों ही देवी विष्णु भगवान की तीन पत्नियां थी तीनों सदा नारायण को प्रसन्न रखने का प्रयास करती रहती थी, ताकि विष्णु भगवान का विशेष प्रेम उन्हें प्राप्त हो सके। इसी सिलसिले में एक बार माँ गंगा ने विष्णुजी के प्रति अपना  लगाव जाहिर किया। जिसकी वजह से माँ सरस्वती को गंगा का लगाव देखकर ईर्ष्या महसूस होने लगी। चलिए आपको पूरी कथा सुनाते हैं मां सरस्वती ने क्यों दिया माता लक्ष्मी और गंगा को श्राप

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सरस्वती माता हुई  भगवान विष्णु से क्रोधित 

तीनों पत्नियों के प्रति समान स्नेह रखने के स्थापित सिद्धांत की अनदेखी कर, गंगा के प्रति अपना लगाव दिखाने के लिए सरस्वती ने अपने पति विष्णु को बहुत सी बातें सुनानी शुरू कर दीं। लक्ष्मी ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन गुस्से के कारण वह नारायण को उसी तरह ताना मारती रही। साथ ही सरस्वती ने भी गंगा को अपशब्द कहे।इस कलह से तंग आकर और अपनी तीनों पत्नियों को लड़ते हुए देखकर भगवान विष्णु कुछ समय के लिए वैकुंठ से बाहर चले गए। नारायण को इस प्रकार बाहर जाते देख सरस्वती जी को बहुत दुःख हुआ लेकिन उन्होंने इसका कारण देवी गंगा को माना।

मां गंगा पर किया प्रहार 

 क्रोध से भरी माँ सरस्वती ने गंगा पर क्रोध करने के लिए प्रहार करना चाहा। ये अनर्थ देख कर लक्ष्मी जी से रहा नहीं गया और वे उन दोनों के बीच में आ गयी। लक्ष्मी ने बीच में आकर दोनों को समझा बुझा कर शांत करने का प्रयास किया।  जिससे देवी गंगा तो शांत हो गयी किन्तु सरस्वती का क्रोध और बढ़ गया। और सरस्वती ने लक्ष्मी को भी गंगा की सहायिका मानते हुए उनका अपमान किया और उन्हें बीच में आने की वजह से वृक्ष बन जाने का श्राप दे दिया। सरस्वती के श्राप के प्रभाव से देवी लक्ष्मी तुरंत तुलसी के पौधे में बदल गई।
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मां गंगा ने क्रोधित होकर दिया श्राप

मां गंगा ये देखकर बहुत गुस्सा हुई कि, उनकी वजह से लक्ष्मी जी को भी ये सब सहना पड़ा।  निर्दोष लक्ष्मी को इस प्रकार श्राप का भाजन बनते देख गंगा ने भी क्रोध में आकर सरस्वती को नदी बनकर भूतल पर प्रवाहित होने का श्राप दे दिया।  सरस्वती भी पीछे नहीं रहीं और दुखी सरस्वती ने भी गंगा को नदी बनने और मानवों की अस्थियाँ ढोने का श्राप दे दिया।  उसके बाद जब विष्णु जी वापस आए तो उन्हें अपनी पत्नियों के झगड़े और श्राप की सारी कहानी पता चली।  साथ ही लक्ष्मी को पौधे में बदला देख उन्हें असीम दुःख हुआ। देवी लक्ष्मी के शांत स्वभाव और सूझ-बूझ के कारण उन्होंने उन्हीं को अपनी पत्नी के रूप में अपने पास रखना उचित समझा

भगवान विष्णु ने  गंगा और देवी सरस्वती का किया त्याग

ये सोच कर कि ऐसी स्थिति पुनः आ सकती है। उन्होंने देवी गंगा और देवी सरस्वती को त्याग देने का निश्चय किया।अलगाव की अपरिहार्य स्थिति से व्यथित होकर वे दोनों डरपोक स्वरों में क्षमा माँगने लगे और शाप का शीघ्र निवारण करने के लिए कहने लगे। तब भगवान विष्णु ने उन्हें बताया कि, गंगा पृथ्वी पर मनुष्यों के पापों की धोने के लिए अवतरित होंगी। और यह नदी के रूप में स्वर्ग, भूलोक और पाताल लोक में त्रिपथगा होकर बहेंगी साथ ही वे अंश रूप में उनके चरणों में, परमपिता ब्रह्मा के कमंडल में और महादेव की जटाओं में भी रहेंगी और  सरस्वती भी उनके साथ भूतल पर ही बहेंगी और साथ ही अंश रूप में उनके साथ रहेंगी केवल देवी लक्ष्मी ही पूर्ण रूप से उनकी पत्नी बनकर बैकुंठ में निवास करेंगी साथ ही उन्होंने शालिग्राम का रूप लेकर देवी लक्ष्मी के तुलसी रूप का भी पाणिग्रहण किया  कहा जाता है कि तब से ही गंगा और सरस्वती एक दूसरे के श्राप के कारण पृथ्वी पर नदी के रूप में बह रही हैं और लक्ष्मी जी हमेशा भगवान विष्णु के साथ उनकी पत्नी बनकर बैकुंठ में निवास करती है.

 

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