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Chandra Dev: आखिर चंद्रमा को किसने दिया श्राप, और कैसे मिली उन्हें श्राप से मुक्ति

jeevanjali Published by: कोमल Updated Tue, 09 Jan 2024 08:09 AM IST
सार

Chandra Dev: कहते हैं इंसान को बहुत सोच-समझकर काम करना चाहिए क्योंकि उसके द्वारा किया गया काम किसी बड़ी विपदा को भी बुलावा दे सकता है। ऐसी ही एक कथा 'शिव पुराण' में मिलती है

चंद्रमा को कैसे मिली श्राप से मुक्ति
चंद्रमा को कैसे मिली श्राप से मुक्ति- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Chandra Dev: कहते हैं इंसान को बहुत सोच-समझकर काम करना चाहिए क्योंकि उसके द्वारा किया गया काम किसी बड़ी विपदा को भी बुलावा दे सकता है। ऐसी ही एक कथा 'शिव पुराण' में मिलती है जिसमें चंद्रमा को अपने आचरण के कारण श्राप का भागी बनना पड़ा चलिए आपको बताते हैं कि कैसे चंद्रदेव को श्राप मिला और उन्हें इस श्राप से कैसे मुक्ति मिली 

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क्यों दिया राजा दक्ष ने चंद्रमा को श्राप

शिव पुराण के अनुसार प्राचीन काल में राजा दक्ष ने अश्विनी सहित अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चंद्रमा से किया था।  वहीं 27 लड़कियों का पति बनकर चंद्रमा बेहद खुश थे वो लड़कियां भी चंद्रमा को अपना दूल्हा बनाकर बहुत खुश थीं लेकिन ये खुशी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं पाई क्योंकि कुछ दिनों बाद, चंद्रमा दक्ष की बेटी रोहिणी पर अधिक मोहित हो गए। जब राजा दक्ष को इस बात का पता चला तो उन्होंने चंद्रमा को समझाया और चंद्रमा ने उनकी बात मानी, लेकिन कुछ दिनों के बाद रोहिणी के प्रति उनका लगाव और अधिक बढ़ गया। 



राजा दक्ष ने दिया चंद्रमा को श्राप

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जब राजा दक्ष को दोबारा इस बात का पता चला तो वे क्रोधित होकर चंद्रमा के पास गए। और कहा, 'मैं तुम्हें पहले भी यह बात समझा चुका हूं. लेकिन लगता है कि मेरी बातों का तुम पर कोई असर नहीं हुआ इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि तुम क्षय रोग से पीड़ित हो जाओगे।' राजा दक्ष के इस श्राप के तुरंत बाद चंद्रमा का रंग पीला पड़ गया और उनकी रोशनी जाती रही यह देखकर चंद्रमा बहुत परेशान हो गए और इंद्रदेव के साथ भगवान ब्रह्मा की शरण में गए।


ब्रह्माजी ने श्राप से मुक्त होने का उपाय सुझाया

 उपाय के अनुसार चंद्रमा को सोमनाथ में भगवान शिव की तपस्या करनी पड़ी और उसके बाद ब्रह्मा के अनुसार, भगवान शिव के प्रकट होने के बाद उन्हें दक्ष के श्राप से मुक्ति मिल सकी चंद्रमा ने बताए गए उपाय के अनुसार  तपस्या की। वह एक महीने तक शिव की कठोर तपस्या करते रहे चंद्रमा की कठोर तपस्या देखकर महादेव प्रसन्न हुए और भगवान शिव ने चंद्रमा को दर्शन दिए और उनसे वरदान मांगने को कहा। चंद्रमा ने वरदान मांगते हुए कहा, 'हे प्रभु, यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे इस क्षय रोग से मुक्त कर दें और मेरे सभी अपराधों को क्षमा कर दें।' भगवान शिव ने कहा, 'जिसने तुम्हें श्राप दिया है वह साधारण व्यक्ति नहीं है लेकिन मैं इस अभिशाप का समाधान ढूंढने की पूरी कोशिश करूंगा। इस श्राप से बचने के लिए बीच का रास्ता निकालते हुए शिव चंद्रमा से कहते हैं कि 'एक माह में दो पक्ष होते हैं, उनमें से एक पक्ष में तुम्हारी उन्नति होती रहेगी। लेकिन दूसरी तरफ तुम्हारी रोशनी कम हो जाएगी. यही कारण है कि एक पक्ष में चंद्रमा बढ़ता है और दूसरे पक्ष में घटता है।



 
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