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Shani Dev:  शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग क्यों नहीं होता?

jeevanjaliPublished by:
कोमल
सार

Shani Dev: शनि देव न्याय, कर्म और दंड के देवता माने जाते हैं। उनकी पूजा करने से कर्मों का फल मिलता है,शनि देव की पूजा से शनि की साढ़े साती और ढैय्या से बचाव होता है, और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

शनिदेव


Shani Dev: शनि देव न्याय, कर्म और दंड के देवता माने जाते हैं। उनकी पूजा करने से कर्मों का फल मिलता है,शनि देव की पूजा से शनि की साढ़े साती और ढैय्या से बचाव होता है, और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। शनि देव की पूजा करते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है, जिनमें से एक है तांबे के बर्तनों का उपयोग न करना। जी हाँ शनि देव की पूजा में कभी भी तांबे के बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए अब ऐसा क्यों है विस्तार से जानते हैं 

तांबे के बर्तनों का उपयोग न करने के पीछे क्या है कारण?

1. शनि और सूर्य का संबंध

तांबा सूर्य देव का प्रतीक माना जाता है। शनि देव, सूर्य देव के पुत्र हैं, लेकिन दोनों के बीच शत्रुता का भाव भी है। इसलिए, शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग करना उचित नहीं माना जाता है।

2. धातुओं का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र में, प्रत्येक ग्रह को एक धातु से जोड़ा जाता है और शनि देव को लोहे की धातु से जोड़ा जाता है। इसलिए, शनि देव की पूजा में लोहे के बर्तनों का उपयोग करना शुभ माना गया है  है।

3. तांबे का ऊर्जावान प्रभाव

तांबा एक ऊर्जावान धातु है। शनि देव की पूजा में शांति और एकाग्रता की आवश्यकता होती है। तांबे की ऊर्जा शांत वातावरण को भंग कर सकती है। इसलिए भी शनि देव की पूजा में कभी भी तांबे के बर्तनों का उपयोग नहीं किया जाता। 

4. शास्त्रों में उल्लेख

शास्त्रों में भी शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों का उपयोग न करने का उल्लेख मिलता है। शनि देव की पूजा में तांबे के बर्तनों के स्थान पर अन्य धातुओं के बर्तनों का उपयोग किया जा सकता है, जैसे:

लोहा: यह शनि देव की प्रिय धातु है।
पीतल: यह भी शुभ धातु मानी जाती है।
चांदी: यह एक पवित्र धातु है और शनि देव को भी प्रिय है।


शनिदेव की पूजा करने की विधि

- शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- घर के पूजा स्थान को स्वच्छ करें और शनिदेव की प्रतिमा स्थापित करें।
- दीप प्रज्वलित करें और धूप-दीप से भगवान शनि की आरती करें।
- शनिदेव को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान करवाएं।
- काले तिल, उड़द की दाल, लोहे की कील, नीले रंग के फूल, नारियल, पान, सुपारी, फल और मिठाई अर्पित करें।
- शनि चालीसा का पाठ करें या शनि मंत्रों का जाप करें।
- आरती करें और भगवान शनि से अपनी मनोकामना व्यक्त करें।
-  दान-पुण्य करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
- शनिवार के दिन मंदिर दर्शन करने जरूर जाएं ।

।।  ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।

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