
Hindu Religion: हर कोई अपने घर की सुख-शांति और समृद्धि के लिए पूजा-पाठ करता है। पूजा के भी कुछ नियम होते हैं, जिसमें एक नियम है पूजा घर में किसी लोटे में जल भरकर रखना। कई लोग हैं जो अपने घर के मंदिर में जल भरकर नहीं रखते हैं अगर आप भी उनमें से है तो छोटे से पात्र में भगवान के समक्ष जल भरकर जरूर रखें। घर के मंदिर में पंच तत्वों की स्थापना होती है इसलिए जल की स्थापना भी जरूरी है। अग्नि की तरह जल की भी अपनी शक्ति और प्रभाव होता है। जिस तरह हम अपने ईष्ट देव के समक्ष दीप प्रज्वलित करते हैं उसी तरह रोज जल को भी स्थान देना चाहिए। वास्तु के अनुसार घर में पंच तत्वों का संतुलन होना जरूरी है।

1. पूजा के पूर्व हम जल से भगवान के विग्रह को स्नान कराने के बाद उनकी पूजा करते हैं।
2. पूजा स्थल पर छिड़काव कर पवित्र करने के लिए भी जल की स्थापना करते हैं।
3. पूजा स्थल पर जल के देवता वरुणदेव की स्थापना करने के लिए भी जल भरकर रखते हैं।
4. नैवेद्य अर्पित करने के बाद भगवान को जल अर्पण करने के लिए ही पूजा घर में पानी रखा जाता है।
5. पूजा में शिव या अन्य देवों का जलाभिषेक करने के लिए भी जल का लोटा रखा जाता है।
6. जब हम आरती करते हैं उसके बाद आरती की थाली पर थोड़ा-सा जल लागकर आरती को ठंडा किया जाता है।
7. आचमन करने के लिए भी पूजा घर में जल की स्थापना करते हैं।

1. पूजा घर उत्तर या ईशान दिशा में हो तो सीधे हाथ की ओर जल का लोटा रखना चाहिए।
2. जल को तांबे या पीतल के पात्र में भरकर ही रखें, तांबे का पात्र उत्तम माना गया है।
3. जल के पात्र को हो सके तो प्रतिदिन धोकर साफ करें और दोबारा उसमें जल भरकर रखना चाहिए।
4. जल में तुलसी के कुछ पत्ते डालने से जल शुद्ध एवं पवित्र होता है। तुलसी से युक्त जल चरणामृत बन जाता है।
5. लोटे में रखा जल अगले दिन कुछ कम हो जाता है बाकी बचे जल को पूरे घर में छिड़क दें, पेड़-पौधे में डाल दें या यदि तांबे के लोटे में जल भरकर उसे ढककर रखा है तो उसे खुद ग्रहण भी कर सकते हैं।

1. घर में उक्त जल का छिड़काव करने से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मकता आती हैं।
2. घर में जल के संतुलन से शांति, सुख, खुशियां और समृद्धि बढ़ती है।
3. पूजा घर में पानी से भरा लोटा रखने से हमारे घर का वास्तु सुधरता है।
4. जल स्थापना के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं।
5. जल स्थापना के कारण गृहकलेश नहीं होने से घर के हर सदस्य की उन्नति होती है।
6. जल का लोटा भरकर रखने से मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है। मन शुद्ध और पवित्र होता है।
7. ऐसी मान्यता है कि घर के बाहर मंदिर में यदि जल का पात्र भरकर रखते हैं तो इससे मूर्ति कभी चटकती नहीं है न ही टूटती-फूटती है।
8. इससे घर पर बुरी शक्तियों का प्रभाव नहीं पड़ता है और नजरदोष से भी बचा जा सकता है।
9. जल को शुद्धता का प्रतीक माना गया है जो कि घर में फैली अशुद्धियों को दूर करता है।
10. तुलसी से युक्त जल को पीने से व्यक्ति निरोगी रहता है।
11. जब हम पूजा स्थल को शुद्ध करते हैं तो देवी एवं देवता प्रसन्न होते हैं।
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