आप लोगों ने सुना होगा कि हनुमान जी अपनी शक्तियां भूल गए थे, लेकिन क्या आपको पता है कि वे अपनी शक्तियां क्यों भूल गए थे और फिर उन्हें अपनी शक्तियां कैसे याद आई। आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब...
Hanuman Ji Ki Shaktiyan: रामायण काल में जब हनुमान जी को अपनी शक्तियों का अभिमान हो गया था तो उन्हें एक ब्राह्मण ने उन्हें श्राप दिया था। जिसके कारण वे अपनी शक्तियां भूल गए थे कि उनका कैसे उपयोग करना है। इसके बाद जब माता सीता का पता लगाने के लिए समुद्र पार करके लंका जाना था। तब हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण जाम्बवान (जामवंत) ने कराया था। हनुमान जी अपनी असीम शक्तियों को एक श्राप के कारण भूल गए थे। पवनपुत्र हनुमान अपनी बाल लीलाओं के दौरान अत्यंत नटखट और शक्तिशाली थे। उनकी असीमित शक्ति के कारण वे कभी-कभी अनजाने में ऋषियों और मुनियों के तप में विघ्न डाल देते थे।
शक्तियों को भूलने की वजह (श्राप)
पौराणिक कथा के अनुसार, जब हनुमान जी बालक थे, तो एक बार उन्हें बहुत भूख लगी थी। उन्होंने सूर्य देव को एक बड़ा सा लाल फल समझकर उसे खाने के लिए आकाश में छलांग लगा दी। उस समय सूर्य ग्रहण होने वाला था और राहु सूर्य को ग्रसने आया था। हनुमान जी ने राहु को भी एक छोटा जीव समझकर निगलने का प्रयास किया। इससे तीनों लोकों में हाहाकार मच गया।
हनुमान जी के इन अद्भुत और अनियंत्रित पराक्रमों से परेशान होकर, कुछ ऋषि-मुनियों ने उन्हें श्राप दे दिया कि "तुम अपनी शक्तियों को भूल जाओगे। तुम्हें अपनी इन अलौकिक शक्तियों का स्मरण तभी होगा, जब कोई तुम्हें इन शक्तियों के बारे में याद दिलाएगा।" यह श्राप हनुमान जी के ही भले के लिए था, ताकि वे अपनी असीम शक्तियों का दुरुपयोग न करें और सही समय आने पर ही उनका उपयोग करें। इस श्राप के कारण हनुमान जी बड़े होने पर अपनी अद्भुत क्षमताओं जैसे उड़ने, विशाल रूप धारण करने और बलवान होने की सभी बातें भूल गए थे।
किसने कराया था शक्तियों का स्मरण
त्रेता युग में, जब रावण ने सीता माता का हरण कर लिया था और भगवान राम लंका जाने के लिए समुद्र तट पर थे, तब विशाल समुद्र को पार करने की चुनौती सामने आई। वानर सेना में कोई भी इतना पराक्रमी नहीं था जो इतने बड़े समुद्र को लांघ सके। सब चिंतित थे। उस समय वानर सेना के वरिष्ठ सदस्य और परम ज्ञानी जामवंत ने हनुमान जी को देखा। जामवंत को हनुमान जी की जन्म से लेकर बाल लीलाओं तक की सभी बातें ज्ञात थीं।
जामवंत ने हनुमान जी के पास जाकर उन्हें उनके बचपन के पराक्रमों की याद दिलाई। उन्होंने हनुमान जी को बताया कि वे पवनदेव के पुत्र हैं, वायु के समान वेगवान हैं और उनमें असीम बल है। जामवंत ने उन्हें सूर्य को फल समझकर निगलने और अन्य शक्तिशाली कारनामों की याद दिलाई, और उन्हें ऋषियों द्वारा दिए गए श्राप के बारे में भी बताया कि उनकी शक्तियां तभी प्रकट होंगी, जब उन्हें याद दिलाया जाएगा।
जामवंत के वचनों को सुनते ही, हनुमान जी को अपनी सभी शक्तियां याद आ गईं। उनका शरीर बढ़ने लगा और वे अपने विशाल रूप में आ गए। इसके बाद ही उन्होंने लंका जाने के लिए समुद्र को लांघने का अद्भुत कार्य किया। इस प्रकार, जामवंत ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने हनुमान जी को उनकी सोई हुई शक्तियों का स्मरण कराया, जिसके बाद उन्होंने भगवान राम के कार्य को सफल बनाने के लिए कई महान कार्य किए।