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Shiv ji Vahan: नंदी कैसा बना शिव जी का वाहन, जानिए पौराणिक कथा

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Tue, 25 Jun 2024 07:08 AM IST
सार

Shiv ji Vahan:  भगवान शिव के गणों में नंदीश्वर सबसे प्रमुख हैं। भगवान शिव के हर मंदिर में उनकी प्रतिमा के साथ नंदी जी की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है। नंदी को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है।

शिव जी वाहन:
शिव जी वाहन:- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Shiv ji Vahan:  भगवान शिव के गणों में नंदीश्वर सबसे प्रमुख हैं। भगवान शिव के हर मंदिर में उनकी प्रतिमा के साथ नंदी जी की प्रतिमा भी स्थापित की जाती है। नंदी को भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है। आपको बता दें कि नंदी को बहुत ही शांत और शालीन गण माना जाता है, आज के लेख में हम आपको बताएंगे कि नंदी कैसे भगवान शिव के वाहन बने।

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कैसे नंदी बने भगवान शिव के वाहन

पुराणों में नंदी महाराज से जुड़ी एक कथा है, शिलाद मुनि जो एक घोर तपस्वी थे, उनके ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने के कारण उनके वंश को समाप्त होते देख उनके पूर्वज चिंतित हो गए और उन्होंने अपनी चिंता शिलाद मुनि से व्यक्त की।

शिलाद मुनि ने भगवान शिव से एक दिव्य पुत्र की कामना की

शिलाद ऋषि निरंतर योग और तप आदि में व्यस्त रहते थे, जिसके कारण वे गृहस्थ जीवन को अपनाना नहीं चाहते थे, इसलिए संतान प्राप्ति की इच्छा से उन्होंने भगवान इंद्र को प्रसन्न किया और जन्म-मृत्यु से मुक्त पुत्र का वरदान मांगा। लेकिन इंद्र यह वरदान देने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने इसके लिए भगवान शिव को प्रसन्न करने को कहा। तब इंद्र के आदेश पर शिलाद ऋषि ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया और उनके समान दिव्य पुत्र की कामना की, जो जन्म-मृत्यु से मुक्त हो।
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भगवान शिव ने शिलाद को आशीर्वाद दिया

भगवान शंकर प्रसन्न हुए और स्वयं को शिलाद के पुत्र के रूप में प्रकट होने का आशीर्वाद दिया। कुछ समय बाद एक दिन जब शिलाद ऋषि भूमि जोत रहे थे, तो उन्हें एक बालक मिला। शिलाद मुनि ने उस बालक का नाम नंदी रखा। उसे बड़ा होते देख एक दिन भगवान शंकर ने वरुण और मित्र नामक दो ऋषियों को शिलाद ऋषि के आश्रम में भेजा, जहां उन दोनों ऋषियों ने नंदी को देखकर भविष्यवाणी की कि उसकी आयु अल्पायु होगी।

नंदी ने भगवान शिव की तपस्या की


जब नंदी को इस बात का पता चला तो वह महादेव शिव की आराधना करने के लिए वन में तपस्या करने चले गए। तब भगवान शिव उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्हें यह वरदान दिया- हे पुत्र नंदी! अब से तुम मृत्यु के भय से पूरी तरह मुक्त हो। अब से तुम अमर हो। अब मेरी कृपा से तुम्हें बुढ़ापे, जन्म और मृत्यु का भय नहीं रहेगा। भगवान शिव ने नंदी को वरदान दिया तब भगवान शंकर ने माता शक्ति की सहमति से और वेदों के अभाव में नंदी को सभी गणों और गणेशों का अधिपति नियुक्त किया। इस तरह नंदी नंदीश्वर बन गए और भगवान शिव ने नंदी को अपना वाहन नियुक्त किया। नंदी का विवाह मरुतों की पुत्री सुयशा से हुआ। भगवान शंकर ने नंदी को यह वरदान भी दिया कि अब से मैं जहां भी निवास करूंगा, तुम भी वहीं निवास करोगे। तब से प्रत्येक शिव मंदिर में शिव के समक्ष नंदीश्वर की स्थापना की जाने लगी।
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