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Sawan 2024: भगवान भोलेनाथ को क्यों प्रिय है बेलपत्र? जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Sun, 23 Jun 2024 12:22 PM IST
सार

BelPatra Chadhane Ke Niyam: सावन का महीना जल्द ही शुरू होने वाला है. 22 जुलाई से सावन शुरू होने जा रहा है. भगवान भोलेनाथ को ये महीना बहुत प्रिय है.

BelPatra Chadhane Ke Niyam
BelPatra Chadhane Ke Niyam- फोटो : jeevanjali

विस्तार

BelPatra Chadhane Ke Niyam: सावन का महीना जल्द ही शुरू होने वाला है आपको बात दें की इस साल 22 जुलाई से सावन की शुरुआत होने जा रहा है. भगवान भोलेनाथ को ये महीना बहुत प्रिय है. श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है. भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है. इसलिए हम पूजा में भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र भी चढ़ाते हैं. बेलपत्र के पत्ते भगवान शिव को बहुत प्रिय हैं, इसलिए अगर भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र न चढ़ाया जाए तो वो अधूरी मानी जाती है. बेलपत्र के जो तीन पत्ते आपस में जुड़े होते हैं उन्हें पवित्र माना जाता है. तीनों पत्ते आपस में जुड़े होते हैं इसलिए इन तीन पत्तों को त्रिदेव माना जाता है और कुछ का मानना है कि तीनों पत्ते महादेव के त्रिशूल का प्रतिनिधित्व करते हैं. मान्यता है कि शिवलिंग पर बेलपत्र के तीन जुड़े हुए पत्ते चढ़ाने से भगवान शिव को शांति मिलती है और भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. अगर भगवान शिव को प्रेम से सिर्फ बेलपत्र के पत्ते ही चढ़ाए जाएं तो भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. आइए जानते हैं भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र चढ़ाने के नियम और लाभ.
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बेल पत्र का महत्व (Importance Of Bel Patra)

शिवपुराण के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष के कारण संसार संकट में पड़ गया था। तब भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष को अपने गले में धारण कर लिया। इससे शिव के शरीर का तापमान बढ़ने लगा और पूरा ब्रह्मांड आग की तरह जलने लगा। इससे धरती पर सभी प्राणियों का जीवन दूभर हो गया। सृष्टि के हित में विष के प्रभाव को खत्म करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव को बेल पत्र खिलाया। बेल पत्र खाने से विष का प्रभाव कम हो गया, तभी से भगवान शिव को बेल पत्र चढ़ाने की प्रथा बन गई।
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शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से जुड़ी पौराणिक कथा (Why is Lord Bholenath fond of Belpatra?)

जब समुद्र मंथन के बाद विष निकला तो भगवान शिव ने पूरे ब्रह्मांड को बचाने के लिए इस विष को अपने कंठ में रख लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और उनका पूरा शरीर बेहद गर्म हो गया जिससे आसपास का वातावरण भी जलने लगा। चूंकि बेलपत्र विष के प्रभाव को कम करता है, इसलिए सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाना शुरू कर दिया। शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए बेलपत्र के साथ ही जल भी अर्पित किया जाने लगा। बेलपत्र और जल के प्रभाव से भोलेनाथ के शरीर में उत्पन्न गर्मी शांत होने लगी और तभी से भगवान शिव को जल और बेलपत्र चढ़ाने की प्रथा शुरू हुई।

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
(Keep These Things In Mind While Offering Belpatra 0n Shivling)

- शिवलिंग पर हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाएं।
- भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से पहले उसे अच्छी तरह धो लें और फिर इस्तेमाल करें।
- जब भी आप भोले शंकर को बेलपत्र चढ़ाएं तो ध्यान रखें कि बेलपत्र चढ़ाने के बाद जल चढ़ाएं।
- बेलपत्र चढ़ाते समय 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप भी करें।

सावन में इस तरह अर्पित करें बेल पत्र (Offer Bel Patra In This Manner In The Month Of Saavan)

- सावन में शिव जी को चंदन का तिलक लगाएं।  
- इसके बाद बेलपत्र, भांग, धतूरा,आदि अर्पित करें। 
- बेलपत्र अर्पित करने के बाद जल से अभिषेक करें। 
- इसके बाद शिव जी के समुख दीप जलाएं 
- भोग में केसर की खीर लगाएं। 
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