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Valmiki Ramayana Ayodhya Kand sarga 96: चित्रकूट पर्वत पर हाथियों के झुंड क्यों भागने लगे? जानिए वजह

जीवांजलि Published by: निधि Updated Wed, 19 Jun 2024 03:53 PM IST
सार

Valmiki Ramayana Ayodhya Kand sarga 96: वाल्मीकि रामायण के इस लेख में हम आपको बताते है की आगे क्या हुआ राजकुमार भरत मुनि भरद्वाज से आज्ञा लेकर अपने बड़े भाई श्री राम से मिलने के लिए प्रस्थान करते है जिसका पता उन्हें खुद मुनि भरद्वाज ने ही बताया था।

Valmiki Ramayana Ayodhya Kand sarga 96
Valmiki Ramayana Ayodhya Kand sarga 96- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Valmiki Ramayana Ayodhya Kand sarga 96: वाल्मीकि रामायण के इस लेख में चलिए हम आपको बताते है की आगे क्या हुआ- राजकुमार भरत मुनि भरद्वाज से आज्ञा लेकर अपने बड़े भाई श्री राम से मिलने के लिए प्रस्थान करते है जिसका पता उन्हें खुद मुनि भरद्वाज ने ही बताया था। धर्मात्मा रघुनन्दन सीताजी के साथ पर्वत पर विराजमान थे और तभी उनके पास आने वाली भरत की सेना की धूल और कोलाहल दोनों एक साथ प्रकट हुए और आकाश में फैलने लगे। इसी बीच में सेना के महान् कोलाहल से भयभीत एवं पीड़ित हो हाथियों के कितने ही मतवाले यूथपति अपने यूथों के साथ सम्पूर्ण दिशाओं में भागने लगे। श्रीरामचन्द्रजी ने सेना से प्रकट हुए उस महान् कोलाहल को सुना तथा भागे जाते हुए उन समस्त यूथपतियों को भी देखा। 
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किस कारण हाथियों का झुंड भागने लगे?

उन भागे हुए हाथियों को देखकर और उस महाभयंकर शब्द को सुनकर श्रीरामचन्द्रजी उद्दीप्त तेज वाले सुमित्राकुमार लक्ष्मण से बोले, पता तो लगाओ, इस विशाल वन में ये जो हाथियों के झुंड अथवा भैंसे या मृग जो सहसासम्पूर्ण दिशाओं की ओर भाग चले हैं, इसका क्या कारण है? भगवान् श्रीराम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण तुरंत ही फूलों से भरे हुए एक शाल-वृक्ष पर चढ़ गये और सम्पूर्ण दिशाओं की ओर देखते हुए उन्होंने पूर्व दिशा की ओर दृष्टिपात किया। तत्पश्चात् उत्तर की ओर मँह करके देखने पर उन्हें एक विशाल सेना दिखायी दी, जो हाथी, घोड़े और रथों से परिपूर्ण तथा प्रयत्नशील पैदल सैनिकों से संयुक्त थी। 
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श्रीराम ने लक्ष्मण से क्या कहा-

घोड़ों और रथों से भरी हई तथा रथ की ध्वजा से विभूषित उस सेना की सूचना उन्होंने श्रीरामचन्द्रजी को दी। इसके बाद वो राम से बोले,  आप अपने धनुष पर प्रत्यञ्चा चढ़ा लें और बाण तथा कवच धारण कर लें। श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा, पहले देखो तो सही कि यह किसकी सेना है? श्रीराम के ऐसा कहने पर लक्ष्मण रोष से प्रज्वलित हुए अग्निदेव की भाँति उस सेना की ओर इस तरह देखने लगे, मानो उसे जलाकर भस्म कर देना चाहते हों। 

 लक्ष्मण ने किसके वध का निर्णय किया?

लक्ष्मण प्रभु श्री राम से बोले, भैया ! निश्चय ही यह कैकेयी का पुत्र भरत है जो हम दोनों को मारने आ रहा है। हम दोनों को धनुष लेकर पर्वत के शिखर पर चलना चाहिये अथवा कवच बाँधकर अस्त्रशस्त्र धारण किये यहीं डटे रहना चाहिये। यह भरत हमारा शत्रु है और सामने आ गया है; अतः वध के ही योग्य है। भरत का वध करने में मुझे कोई दोष नहीं दिखायी देता।

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