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Pauranik Katha Of Rishi Durvasa: कौन थे ऋषि दुर्वासा? जानिए क्या है भगवान शिव से उनका संबंध

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Thu, 13 Jun 2024 11:56 AM IST
सार

Pauranik Katha Of Rishi Durvasa: दुर्वासा ऋषि माता अनुसूया और ऋषि अत्रि के पुत्र थे। ऋषि दुर्वासा के संदर्भ में कहा जाता है कि वे तीनों युगों- सत्ययुग, द्वापर युग और त्रेता युग में विद्यमान थे।

Pauranik Katha Of Rishi Durvasa:
Pauranik Katha Of Rishi Durvasa:- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Pauranik Katha Of Rishi Durvasa: दुर्वासा ऋषि माता अनुसूया और ऋषि अत्रि के पुत्र थे। ऋषि दुर्वासा के संदर्भ में कहा जाता है कि वे तीनों युगों- सत्ययुग, द्वापर युग और त्रेता युग में विद्यमान थे। ऋषि दुर्वासा अत्यंत बुद्धिमान थे और उन्होंने कई ऋचाओं की रचना की थी। ऋषि दुर्वासा अपने क्रोध के लिए जाने जाते थे। ऋषि दुर्वासा को भगवान शिव का पुत्र कहा जाता है। ऋषि दुर्वासा का जन्म क्रोध के कारण हुआ था। ऋषि दुर्वासा के जन्म की कथा पौराणिक ग्रंथों में वर्णित है। आइए जानते हैं ऋषि दुर्वासा कौन थे और उनका जन्म कैसे हुआ।
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कैसे हुई ऋषि दुर्वासा की उत्पत्ति?

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार मां पार्वती भगवान भोलेनाथ के साथ एकांत जीवन व्यतीत कर रही थीं, तभी अचानक देवताओं ने आकर उनके एकांत निवास में विघ्न डाल दिया। इससे भगवान शिव का क्रोध चरम पर पहुंच गया। भोलेनाथ का क्रोध देखकर सभी देवता भयभीत हो गए। कथा के अनुसार मां अनुसूया भोलेनाथ और मां पार्वती के दर्शन करने कैलाश पहुंचीं, तब पार्वती मां ने शिव को शांत करने का प्रयास किया। भोलेनाथ तो शांत हो गए, लेकिन उनके क्रोध से पैदा हुई ऊर्जा कैलाश में इधर-उधर टकराने लगी और कैलाश को नुकसान पहुंचाने लगी। तब भगवान शिव ने बताया कि वे इस ऊर्जा को दोबारा अपने अंदर समाहित नहीं कर सकते क्योंकि यह ऊर्जा उनकी तीसरी आंख से निकली है और अगर उनकी तीसरी आंख दोबारा खुली तो इससे ब्रह्मांड को और भी ज्यादा नुकसान होगा।
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माता अनुसूया ने महादेव से मांगी किस बात की अनुमति?

जब माता अनुसूया ने यह सुना तो उन्होंने महादेव से अनुमति मांगी कि वह अपनी तपस्या से इस क्रोध ऊर्जा को अपने भीतर धारण कर सकती हैं। महादेव ने भी माता अनुसूया को अनुमति दे दी, जिसके बाद माता अनुसूया ने इस ऊर्जा को अपने गर्भ में धारण कर लिया। माता अनुसूया ने क्रोध ऊर्जा को अपने गर्भ में धारण कर लिया था, जिसके कारण महादेव के क्रोध से ऋषि दुर्वासा का जन्म हुआ और क्रोध की अग्नि से प्रकट होने के कारण उनके स्वभाव में अत्यधिक क्रोध समाहित हो गया।

ऋषि दुर्वासा का स्वभाव कैसा था?

ऋषि दुर्वासा अत्यंत क्रोधी होते थे। वह क्रोध में किसी को भी श्राप दे देते थे, इसी कारण सभी देवता भी उनका सम्मान करते थे। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार महाभारत में दुर्वासा ऋषि के मंत्र से कुंती ने सूर्यपुत्र कर्ण को जन्म दिया था। वहीं ऋषि दुर्वासा को महाभारत में लक्ष्मण की मृत्यु का कारण भी माना जाता है।

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