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Mahabharat Story: युधिष्ठिर के भाइयों को यक्ष ने क्यों मारा था, फिर कैसे बची जान?

JeevanjaliPublished by:
नीरज पटेल
सार

Mahabharat Katha: महाभारत में वर्णित यक्ष प्रश्न प्रसंग धर्म और नीति पर आधारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है। यह कथा न केवल पांडवों के जीवन से जुड़ी है बल्कि जीवन की गहरी शिक्षाएं भी देती है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों युधिष्ठिर के भाइयों को यक्ष ने मारा और फिर कैसे उनकी जान बची।
 

युधिष्ठिर के भाइयों को यक्ष ने क्यों मारा था, फिर कैसे बची जान?
Mahabharat Katha Importance: महाभारत काल में पांडव वनवास का समय व्यतीत कर रहे थे। एक दिन जब वे वन में भटक रहे थे, तब भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव को अत्यधिक प्यास लगी। युधिष्ठिर ने सहदेव को पास के झरने से पानी लाने भेजा। सहदेव जब जल लेने पहुंचे तो वहां एक अदृश्य यक्ष ने उसे चेतावनी दी कि बिना प्रश्नों का उत्तर दिए पानी पीने का प्रयास न करे। किंतु सहदेव ने प्यास के कारण उसकी बात अनसुनी कर दी और जैसे ही उसने जल पिया, वह मूर्छित होकर गिर पड़ा। इसके बाद अर्जुन, नकुल और भीम भी बारी-बारी से पानी लेने पहुंचे और सभी ने यक्ष की चेतावनी को अनदेखा कर दिया। परिणामस्वरूप, वे भी मृतवत हो गए।

युधिष्ठिर का यक्ष से संवाद

जब चारों भाई नहीं लौटे, तो युधिष्ठिर स्वयं वहां पहुंचे। उन्होंने अपने भाइयों को मृतवत अवस्था में देखा। तभी यक्ष ने उन्हें भी जल पीने से पहले प्रश्नों का उत्तर देने की शर्त रखी। युधिष्ठिर ने संयम और धैर्य से यक्ष की बात मानी और उसके द्वारा पूछे गए दर्जनों प्रश्नों का उत्तर दिया। ये प्रश्न धर्म, नीति, सत्य, जीवन, कर्तव्य और आध्यात्मिकता से जुड़े हुए थे। उदाहरण के लिए यक्ष ने पूछा-


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युधिष्ठिर ने सभी प्रश्नों का उत्तर ज्ञान और विवेक से दिया। उनकी सत्यनिष्ठा और धैर्य से प्रसन्न होकर यक्ष ने अपनी वास्तविकता प्रकट की।

यक्ष का रहस्य

वह यक्ष कोई और नहीं बल्कि यमराज थे, जो युधिष्ठिर की परीक्षा लेने के लिए इस रूप में आए थे। यमराज युधिष्ठिर के धर्म, धैर्य और विवेक की परीक्षा लेना चाहते थे।

भाइयों का जीवनदान

युधिष्ठिर की नीतिपूर्ण उत्तरों से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया। उन्होंने कहा कि वे अपने किसी एक भाई को जीवित करवा सकते हैं। युधिष्ठिर ने सबसे छोटे भाई नकुल को जीवित करने की प्रार्थना की।

जब यमराज ने कारण पूछा, तो युधिष्ठिर ने कहा कि “पांडवों में मैं कुंती का पुत्र हूं और नकुल माद्री का। यदि केवल मेरे ही भाई जीवित हों तो अन्य माता (माद्री) का वंश नष्ट हो जाएगा। इसलिए न्याय यही है कि दोनों माताओं का वंश सुरक्षित रहे।” युधिष्ठिर की निष्पक्षता और न्यायप्रियता से यमराज अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने चारों भाइयों को जीवनदान दे दिया।

मिलती है ये शिक्षा

इस प्रसंग से यह शिक्षा मिलती है कि लोभ, अधीरता और उतावलेपन से विनाश होता है, जबकि संयम, विवेक और धर्म का पालन करने से हर कठिनाई का समाधान निकलता है। युधिष्ठिर की धैर्यशीलता और न्यायप्रियता ही उनके भाइयों के जीवन बचाने का कारण बनी। यक्ष द्वारा पांडवों की परीक्षा महाभारत का अत्यंत महत्वपूर्ण प्रसंग है। यह घटना दर्शाती है कि सच्चे धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति में भी विजय प्राप्त करता है। युधिष्ठिर की बुद्धिमत्ता और निष्पक्षता ही वह कारण बनी जिसके कारण उनके चारों भाइयों की जान बची।

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