विज्ञापन
Home  mythology  krishna morpankh why does lord krishna wear peacock feathers on his crown

Krishna Morpankh: भगवान कृष्ण अपने मुकुट पर क्यों धारण करते हैं मोर पंख? जानिए इसका रोचक रहस्य

जीवांजलि Published by: निधि Updated Tue, 18 Jun 2024 07:14 PM IST
सार

Krishna Morpankh: माता यशोदा अपने कान्हा को बहुत अच्छे से सजाती थीं और उनके मुकुट पर हमेशा एक मोर पंख लगाती थीं। कान्हा के मुकुट पर हमेशा मोर पंख क्यों सजाया जाता है? इसके पीछे कई कहानियां हैं.

Krishna Morpankh
Krishna Morpankh- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Krishna Morpankh: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बांसुरी और मोर पंख के बिना कान्हा का स्वरूप अधूरा है. भगवान कृष्ण को मोर पंख बहुत प्रिय है. यही वजह है कि उनके मुकुट में हमेशा मोर पंख मौजूद रहता है. शास्त्रों के अनुसार विष्णु के अवतारों में सिर्फ कृष्ण ने ही मोर का मुकुट धारण किया है. कान्हा का मोर पंख धारण करना उनके प्रति सिर्फ प्रेम या लगाव ही नहीं है, बल्कि इसके जरिए भगवान ने कई संदेश भी दिए हैं. मोर पंख को उनके सिर पर क्यों सजाया जाता है, इसके पीछे कई कारण हैं. आइए जानते हैं.
विज्ञापन
विज्ञापन

जब मोर को दिया आश्वासन

कहानी है कि जब भगवान विष्णु ने त्रेता युग में श्री राम का अवतार लिया और जब श्री राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष के लिए वनवास पर गए थे। उस समय वन में रावण ने सीता का अपहरण कर लिया था। तब राम और लक्ष्मण सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थे और सभी से सीता के बारे में पूछ रहे थे कि क्या उन्होंने सीता को कहीं देखा है? तब एक मोर ने कहा कि प्रभु मैं आपको वह रास्ता बता सकता हूं जहां रावण सीता माता को ले गया है, लेकिन मैं हवाई मार्ग से जाऊंगा और आप पैदल जाएंगे। लेकिन आप अपना रास्ता भटक सकते हैं, इसलिए मैं एक-एक पंख गिराता रहूंगा ताकि आप अपना रास्ता न भटक जाएं और इस तरह मोर ने श्री राम को रास्ता दिखाया लेकिन अंत में उसकी मृत्यु हो गई क्योंकि मोर के पंख एक खास मौसम में अपने आप गिर जाते हैं, अगर पंख जानबूझकर इस तरह से गिरते हैं, तो व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। श्री राम ने मोर से कहा कि यद्यपि वे इस जीवन में उसका एहसान नहीं चुका सकते, फिर भी अगले जन्म में उसके सम्मान में वे इस पंख को अपने मुकुट में धारण करेंगे और इस प्रकार भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण के रूप में जन्म लिया और मोर पंख को अपने मुकुट में धारण किया।

राधा से प्रेम की निशानी

कान्हा के पास मोर पंख होना राधा के प्रति उनके अटूट प्रेम की निशानी है. मान्यताओं के अनुसार एक बार राधा कृष्ण की बांसुरी पर नृत्य कर रही थीं, तभी महल में मोर भी उनके साथ नृत्य करने लगे. इस दौरान एक मोर पंख नीचे गिर गया. तब श्रीकृष्ण ने इसे अपने माथे पर सजा लिया. उन्होंने मोर पंख को राधा के प्रेम का प्रतीक माना.
विज्ञापन

कालसर्प योग

मोर और सांप शत्रु हैं. यही वजह है कि कालसर्प योग में अपने साथ मोर पंख रखने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि श्री कृष्ण को भी कालसर्प योग था। कालसर्प दोष के प्रभाव से बचने के लिए भगवान कृष्ण हमेशा अपने साथ मोर पंख रखते थे।

शत्रु को दिया विशेष स्थान

श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम शेषनाग के अवतार थे। मोर और सांप एक दूसरे के शत्रु हैं। लेकिन कृष्ण के माथे पर लगा मोर पंख यह संदेश देता है कि वे शत्रु को भी विशेष स्थान देते हैं।

यह भी पढ़ें-
Kaner Plant: घर में कनेर का पौधा लगाना शुभ है या अशुभ जानिए
Mangal Dosh Nivaran: किस मंदिर में होती मंगल दोष की पूजा जानिए पूरी जानकारी
Kanwar Yatra 2024: इस साल कब से शुरु होगी कांवड़ यात्रा, जानिए तिथि और महत्व


 
विज्ञापन