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Bhagwat Geeta Chapter 9 Verse 25: ऐसे लोग लेते है भूत प्रेतों के बीच में जन्म! कृष्ण से अर्जुन से कहा ये रहस्य

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Tue, 02 Jul 2024 10:56 AM IST
सार

Bhagwat Geeta Chapter 9 Verse 25: भगवद्गीता के इस लेख में हम आपको बाते है की आगे क्या हुआ , इस शरीर रूप को धारण करके के बाद आत्मा का लक्ष्य उस परम ईश्वर की प्राप्ति होना चाहिए।

Bhagwat Geeta Chapter 9 Verse 25:
Bhagwat Geeta Chapter 9 Verse 25:- फोटो : eevanjali

विस्तार

Bhagwat Geeta Chapter 9 Verse 25: भगवद्गीता के इस लेख में हम आपको बाते है की आगे क्या हुआ , इस शरीर रूप को धारण करके के बाद आत्मा का लक्ष्य उस परम ईश्वर की प्राप्ति होना चाहिए ना कि भौतिक सुख सुविधा के लिए सिर्फ देवताओं को प्रसन्न करके खुश रहना। आगे कृष्ण कहते है -
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भगवत गीता अध्याय 9 श्लोक 25 - Bhagwat Geeta Chapter 9 Verse 25

यान्ति देवव्रता देवान्पितॄन्यान्ति पितृव्रताः। भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम्

यान्ति–जाते हैं; देव-व्रताः-देवताओं की पूजा करने वाले; देवान्–देवताओं के बीच; पितृन्-पित्तरों के बीच; यान्ति–जाते हैं; पितृ-व्रता:-पित्तरों की पूजा करने वाले; भूतानि-भूत-प्रेतों के बीच; यान्ति–जाते हैं; भूत-इज्या:-भूत-प्रेतों की पूजा करने वाले; यान्ति-जाते हैं; मत्-मेरे; याजिनः-भक्तगण;अपि-लेकिन; माम्-मेरे पास।


अर्थ - जो देवताओं की पूजा करते हैं वे देवताओं के बीच जन्म लेते हैं। जो पित्तरों की पूजा करते हैं वे पितरों की योनियों में जन्म लेते है। भूत-प्रेतों की पूजा करने वाले उन्हीं के बीच जन्म लेते है और केवल मेरे भक्त मेरे धाम में मेरे साथ ही निवास करते है। 
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व्याख्या - पिछले श्लोक में जब श्री कृष्ण देवताओं के प्रति किए जा रहे यज्ञ को त्रुटिपूर्ण भक्ति कहते है तो किसी भी मनुष्य के मन में यह प्रश्न आ सकता है कि इसका परिणाम कही गलत तो नहीं होगा ? इस श्लोक में श्री कृष्ण इसी सवाल का जवाब दे रहे है। वो कहते है कि अगर कोई मेरी भक्ति नहीं कर रहा इसका अर्थ ये नहीं है कि वो जीवन में कुछ गलत कर रहा है बस उसकी गति बदल जाती है। 

जैसे अगर आप किसी देवता की पूजा करते है तो आपको उसी देवता के मन्त्र जाप करने होंगे और उसी प्रकार का कर्म कांड करना होगा जो वेद में उस देवता को प्रसन्न करने के लिए लिखा गया है। ऐसे करने से आपको संसार के सुख मिल जाते है और अंत में आप उसी देवता को प्राप्त होते है। फिर एक समय पूर्ण होने के बाद वापिस पृथ्वी पर आना होगा। आगे कृष्ण कहते है कि आप पितरों की पूजा करेंगे तो आप पितर लोक में जाकर उनके साथ ही निवास करेंगे। 

हमने कई ऐसे लोगों को देखा है जो कुछ कार्य सिद्ध करने के लिए भूत प्रेत का सहारा लेते है। अगर उनको ऐसा लगता है कि ऐसा करने से उनको मुक्ति मिल जायेगी तो वो गलत सोच रहे है। काला जादू करने वाले लोग और तंत्र मंत्र करने वाले लोग उन्ही के बीच जन्म लेते है। इसके बाद एक प्रश्न यह आ सकता है कि आखिर परम धाम किसे प्राप्त होगा?

इस श्लोक में कृष्ण इस सवाल का भी जवाब दे रहे है। वो कह रहे है कि सिर्फ मेरे भक्त ही मेरे धाम में मेरे साथ निवास कर सकते है। जैसा कि पिछले श्लोकों में भी कृष्ण इस बात को कह चुके है कि मेरे माध्यम से जीवात्मा जन्म मरण से मुक्त हो सकती है। कृष्ण की भक्ति के अलावा ऐसा कोई माध्यम नहीं है जो आपको संसार चक्र से मुक्त कर सके।
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