विज्ञापन
Home  dharm  why is lord shiva called adiyogi lord shiva how did lord shiva come to be known as adiyogi

Adiyogi Lord Shiva:भगवान शिव कैसे कहलाए आदियोगी जानिए पौराणिक कथा

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Fri, 28 Jun 2024 05:03 AM IST
सार

Adiyogi Lord Shiva: भगवान शिव को नीलकंठ, भोलेनाथ, शंकर, महादेव, गंगाधर कहा जाता है आज के इस लेख में हम आपको आदियोगी के बारे में बताएंगे कि भगवान शिव को आदियोगी क्यों कहा जाता है

आदियोगी भगवान शिव,
आदियोगी भगवान शिव,- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Adiyogi Lord Shiva: भगवान शिव को नीलकंठ, भोलेनाथ, शंकर, महादेव, गंगाधर कहा जाता है आज के इस लेख में हम आपको आदियोगी के बारे में बताएंगे कि भगवान शिव को आदियोगी क्यों कहा जाता है और आदियोगी मूर्ति का क्या है महत्व। 

विज्ञापन
विज्ञापन

भगवान शिव क्यों कहलाए आदियोगी 

आदियोगी का शाब्दिक अर्थ है प्रथम योगी या आदिगुरु। कई पुराणों में भी वर्णित है कि भगवान शिव ही योग के प्रथम गुरु या योग के प्रवर्तक हैं। इसलिए भगवान शिव को आदियोगी कहा जाता है। आदियोगी यानी भगवान शिव ने अपने सात शिष्यों यानी सप्तऋषियों को योग का ज्ञान दिया, जिसमें उन्होंने 112 विधियां बताईं। इनके माध्यम से मनुष्य अपनी सीमाओं से परे जाकर अपनी परम क्षमता तक पहुंच सकता है। सरल शब्दों में कहें तो योग इस जीवन की मूल संरचना को जानने और उसे उसकी परम संभावना तक ले जाने का विज्ञान और तकनीक है। आज हम विज्ञान को योग विज्ञान के नाम से जानते हैं, जिसके जनक शिव हैं।
विज्ञापन

आदियोगी प्रतिमा का महत्व

भगवान शिव एक अमर शक्ति हैं जिन पर पद, रूप और काल का कोई बंधन नहीं है। साथ ही हिंदू धर्म में उन्हें सर्वोच्च शक्ति माना जाता है। देवाधिदेव महादेव मनुष्य को उसके कर्मों के बंधन से मुक्त करते हैं। यह प्रतिमा आदियोगी यानी भगवान शिव को समर्पित है। आदियोगी शिव प्रतिमा महान 'योगी' को गहन ध्यान और पारलौकिक वास्तविकता में पूरी तरह से लीन दिखाती है। ईशा फाउंडेशन के अनुसार, यह प्रतिष्ठित चेहरा मुक्ति का प्रतीक है और 112 मार्गों का प्रतिनिधित्व करता है जिसके माध्यम से मनुष्य योग के विज्ञान के माध्यम से अपनी परम प्रकृति को प्राप्त कर सकता है।

आदियोगी प्रतिमा की विशेष विशेषताएँ

हर अमावस्या के दिन, आस-पास के गाँवों के लोग योगेश्वर लिंग को पारंपरिक प्रसाद चढ़ाते हैं। योगेश्वर लिंग पर चार दक्षिण भारतीय भाषाओं: तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में "शंभो" मंत्र लिखा हुआ है। आदियोगी प्रतिमा की गर्दन की माला असली रुद्राक्ष से बनी है। यह दुनिया की सबसे बड़ी रुद्राक्ष माला भी है, जिसमें 100,008 रुद्राक्ष हैं। भक्त आदियोगी के चारों ओर 621 त्रिशूलों पर काला कपड़ा बांधकर भगवान आदियोगी को वस्त्र अर्पित करते हैं।

Akshat Puja: पूजा में क्यों चढ़ाया जाता है अक्षत, जानिए अक्षत का महत्व

Lord Vishnu: भगवान विष्णु को क्यों कहा जाता है नारायण ? जानिए इसके पीछे की कहानी

Shani Upay: कैसे पहचानें कुंडली में कमजोर शनि के लक्षण? जानिए शनि ग्रह को मजबूत करने के उपाय

विज्ञापन