Ganesh Murti: अगर आप अपने घर में भगवान गणेश की स्थापना करने जा रहे हैं तो सबसे पहले जान लीजिए कि घर में स्थापना के लिए किस तरह की मूर्ति लाना शुभ रहेगा। ताकि आपको जीवन में परेशानियों का सामना न करना पड़े।
Ganesh Chaturthi 2025 Murti Importance: हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर घर में गणपति बप्पा की मूर्ति लाना और उसे स्थापित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। लेकिन, इस प्रक्रिया को सही विधि और नियमों के अनुसार करना चाहिए ताकि भगवान गणेश का पूरा आशीर्वाद मिल सके। आइए जानते हैं, गणेश चतुर्थी पर किस तरह की मूर्ति घर लानी चाहिए और उसकी स्थापना की सही विधि क्या है।
कैसी मूर्ति लाएं घर?
सूंड की दिशा
गणेश चतुर्थी पर मूर्ति खरीदते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। घर के लिए ऐसी मूर्ति लाना सबसे शुभ होता है जिसमें भगवान गणेश की सूंड बाईं ओर मुड़ी हो। इसे वाममुखी गणेश भी कहा जाता है और यह सुख, समृद्धि और सफलता की दिशा मानी जाती है। दाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाली मूर्ति (दक्षिणामुखी) की पूजा के नियम बहुत कठिन होते हैं, इसलिए ऐसी मूर्तियाँ आमतौर पर मंदिरों में स्थापित की जाती हैं।
मूर्ति की मुद्रा
घर के लिए हमेशा बैठे हुए गणपति की मूर्ति लाना चाहिए। ऐसी मूर्ति स्थिरता और शांति का प्रतीक होती है, जिससे घर में सुख और शांति बनी रहती है। खड़े हुए गणपति की मूर्ति को पंडालों या सार्वजनिक स्थानों के लिए शुभ माना जाता है।
मूर्ति की सामग्री
मूर्ति हमेशा मिट्टी या प्राकृतिक सामग्री से बनी होनी चाहिए। प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियों का उपयोग करने से बचना चाहिए, क्योंकि वे पर्यावरण के लिए हानिकारक होती हैं।
साथ में मूषक और मोदक
मूर्ति खरीदते समय यह भी देखें कि उसमें भगवान गणेश का वाहन मूषक और उनकी प्रिय मिठाई मोदक भी हो। ये दोनों चीजें गणेश जी की पूजा का अभिन्न अंग हैं।
स्थापना की सही विधि
भगवान गणेश की मूर्ति को घर लाते समय उनके चेहरे को लाल कपड़े से ढक कर लाएं। घर में प्रवेश करते समय उनका स्वागत जयकारे लगाते हुए करें और उन पर फूलों की वर्षा करें।
मूर्ति स्थापित करने से पहले घर को अच्छी तरह साफ करें। पूजा स्थल पर एक लकड़ी की चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं।
वास्तु के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्ति को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में स्थापित करना सबसे शुभ होता है। मूर्ति का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
मूर्ति को चौकी पर स्थापित करें। हाथ में थोड़े से चावल और फूल लेकर 'ॐ गं गणपतये इहागच्छ इह सुप्रतिष्ठो भव' मंत्र का जाप करते हुए उनका आह्वान करें।
भगवान गणेश को गंगाजल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें। इसके बाद, उन्हें नए वस्त्र पहनाएं, तिलक लगाएं और दूर्वा, फूल और मोदक अर्पित करें। इन नियमों का पालन करके आप भगवान गणेश की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहेगी।