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Rudraksh: क्या है रुद्राक्ष, इसे कैसे करें धारण, किस अंग में कितने पहने रुद्राक्ष? पढ़ें हर सवाल का जवाब

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Sat, 29 Jun 2024 12:37 PM IST
सार

Rudraksh: भगवान् शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद पवित्र माह होता है। इस पूरे महीनें शिव की सेवा करने से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती है।

Rudraksh
Rudraksh- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Rudraksh: भगवान् शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद पवित्र माह होता है। इस पूरे महीनें शिव की सेवा करने से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती है। इस बार सावन की शुरुआत और अंत दोनों सोमवार को हो रहा है इसलिए कुल 5 व्रत आएंगे। सावन 22 जुलाई सोमवार से शुरू होकर 19 अगस्त सोमवार को ही पूर्ण होने जा रहा है। आज इस लेख में रुद्राक्ष से जुडी जानकारी बताने जा रहे है। 
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शिव पुराण की विधेश्वर संहिता के अध्याय 25 में स्वयं महादेव ने पार्वती को रुद्राक्ष के रहस्य प्रकट किए है। शिव ने कहा, मैं मन को संयम में रखकर हजारों दिव्य वर्षों तक घोर तपस्या में लगा रहा। एक दिन से सहसा मेरा मन क्षुब्ध हो उठा। मैंने लीलावश ही अपने दोनों नेत्र खोलें, खोलते ही मेरे मनोहर नेत्रपुटों से कुछ जल की बूंदे गिरी और उसी से रुद्राक्ष का जन्म हुआ है।  भूतल पर अपने प्रिय रुद्राक्ष को मैंने गौड़ प्रदेश में उत्पन्न किया।

मथुरा, अयोध्या, लंका, मलियागिरी, काशी तथा अन्य देशों में भी उनके अंकुर उगाए। भोग और मोक्ष की इच्छा रखने वाले चारों वर्णों के लोगों और विशेषतः शिव भक्तों को शिव पार्वती की प्रसन्नता के लिए रुद्राक्ष के फलों का अवश्य धारण करना चाहिए। आंवले के फल के बराबर रुद्राक्ष श्रेष्ठ बताया गया है। जो पेड़ के फल के बराबर हो उसे मध्यम श्रेणी का कहा गया है और जो चने के बराबर हो उसकी गणना निम्न कोटि में की गई है। पापों का नाश करने के लिए रुद्राक्ष धारण आवश्यक बताया गया है। वह निष्चय ही संपूर्ण मनोरथों का साधक है।
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अतः उसे अवश्य धारण करना चाहिए। जिस रुद्राक्ष में अपने आप ही छेद हो गया हो वही यहां उत्तम माना गया है। जिसमें मनुष्य के प्रयत्न से छेद किया गया हो वह मध्यम श्रेणी का होता है। इसके बाद सूत गोस्वामी जी ऋषियों को यह बतलाते है कि शरीर के किस अंग में कितने रुद्राक्ष धारण करें। सूत जी बोले- महर्षियों ! सिर पर ईशान मंत्र से, कान में तत्पुरुष मंत्र से तथा गले और ह्रदय में अघोर मंत्र से रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

श्वेत रूद्राक्ष केवल ब्राह्मणों को ही धारण करना चाहिए। गहरे लाल रंग का रुद्राक्ष क्षेत्रियों के लिए हितकर बताया गया है। वैश्यों के लिए प्रतिदिन बारंबार पीले रुद्राक्ष को धारण करना आवश्यक है और शूद्र को काले रंग का रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। विद्वान पुरुष दोनों हाथों मे अघोर बीजमंत्र से रुद्राक्ष धारण करें। उदर पर वामदेव मंत्र से 15 रूद्राक्ष द्वारा गूँथी हुई माला धारण करें अथवा अंगो सहित प्रणव का 5 बार जप करके रुद्राक्ष की तीन, पांच या 7 मालाएं धारण करें अथवा मूल मंत्र (नमः शिवाय) से ही समस्त रुद्राक्षों को धारण करें।

जिसके ललाट में त्रिपुंड लगा हो और सभी अंग रुद्राक्ष से विभूषित हो तथा जो मृत्युंजय मंत्र का जप कर रहा है उसका दर्शन करने से साक्षात रुद्र के दर्शन का फल प्राप्त होता है।
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