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Brahma Muhurta: क्या होता है ब्रह्ममुहूर्त? क्यों माना जाता है इसे शुभ? जानिए इसका महत्व

जीवांजलि Published by: निधि Updated Tue, 18 Jun 2024 12:47 PM IST
सार

What Is Brahma Muhurta: मुहूर्त का अर्थ है अनुकूल समय। रात्रि का अंतिम पहर यानी सुबह 4 से 5.30 बजे तक का समय ब्रह्ममुहूर्त कहलाता है।
 

Brahma Muhurta
Brahma Muhurta- फोटो : jeevanjali

विस्तार

What Is Brahma Muhurta: मान्यता है कि रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक आसुरी और रहस्यमयी शक्तियों का प्रभाव रहता है। ब्रह्ममुहूर्त यानी सुबह 4 बजे के बाद भगवान निवास करते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार ब्रह्ममुहूर्त वह समय होता है जब देवता धरती पर आते हैं और उस समय सभी धार्मिक स्थलों के कपाट खोल दिए जाते हैं। ब्रह्ममुहूर्त में देवताओं को नमस्कार किया जाता है। उन्हें स्नान कराने और फिर स्थापित करने का अनुष्ठान होता है। शोध की मानें तो सुबह जल्दी उठने से हमारा तन और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं और शरीर में ऊर्जा का प्रवाह होता है। यही वजह है कि हमारी प्राचीन परंपराओं में भी सुबह उठने का समय निश्चित किया गया है। 
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क्या है ब्रह्ममुहूर्त (What Is Brahmamuhurta?)

'ब्रह्ममुहूर्त' का अर्थ है रात्रि का अंतिम पहर या सूर्योदय से डेढ़ घंटा पहले का समय। सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घंटा) पहले ब्रह्ममुहूर्त में उठ जाना चाहिए। इस समय सोना शास्त्रों में वर्जित है। ब्रह्म का अर्थ है परम तत्व या ईश्वर। मुहूर्त का अर्थ है अनुकूल समय। रात्रि का अंतिम पहर यानी सुबह 4 से 5.30 बजे तक का समय ब्रह्ममुहूर्त कहलाता है।
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ब्रह्म मुहूर्त का महत्व (Importance of Brahma Muhurta)

ब्रह्म मुहूर्त में जागना हमारे जीवन के लिए बहुत लाभकारी है। इससे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है और हम पूरे दिन ऊर्जावान बने रहते हैं। ऋग्वेद में कहा गया है कि- प्रात: रत्नं प्रातरित्वा दधाति तम चिकित्वां प्रतिगृह्या नि धत्ते। तेन प्रजां वर्धयामां आयु रईस्पोषेण सचते सुविरः। अर्थात जो व्यक्ति प्रातः सूर्योदय से पहले जागता है, उसे उत्तम स्वास्थ्य का रत्न प्राप्त होता है, इसीलिए बुद्धिमान लोग उस समय को व्यर्थ नहीं गंवाते। जो व्यक्ति प्रातः काल जल्दी उठता है, वह बलवान, स्वस्थ, बलवान, सुखी, दीर्घायु और वीर होता है। हमारे ऋषियों ने भी इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्यागने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। ब्रह्म मुहूर्त में जागने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

ब्रह्म मुहूर्त में जागने के फायदे (Benefits of waking up in Brahma Muhurta)

ब्रह्म मुहूर्त में तामस और रजो गुणों की मात्रा बहुत कम होती है। इस समय सत्वगुण का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए इस अवधि में बुरे मानसिक विचार भी सात्विक और शांत हो जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इस समय बहने वाली वायु चंद्रमा से प्राप्त अमृत कणों की मौजूदगी के कारण हमारे स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान होती है। इसे वीरवायु कहते हैं। इस समय टहलने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और शरीर कांतिमय हो जाता है। जब हम सुबह उठते हैं तो यह अमृतमयी वायु हमारे शरीर को स्पर्श करती है। इसके स्पर्श से हमारे शरीर में तेज, शक्ति, ऊर्जा और बुद्धि आती है, जिससे मन प्रसन्न और शांत होता है। इसके विपरीत देर रात तक जागने और सुबह देर से सोने से हमें यह लाभकारी वायु नहीं मिल पाती, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से सबसे अच्छे परिणाम मिलते हैं। स्नान करते समय अगर ब्रह्म परमात्मा का स्मरण करें तो इसे ब्रह्म स्नान कहते हैं और अगर देव नदियों का स्मरण करें तो इसे देव स्नान कहते हैं।
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