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Yogini Ekadashi 2024 Date: जुलाई माह में कब है योगिनी एकादशी व्रत? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

जीवांजलि Published by: निधि Updated Tue, 02 Jul 2024 11:46 AM IST
सार

Ashadh Yogini Ekadashi 2024 Date: हर साल आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस बार योगिनी एकादशी 02 जूलाई 2024 मंगलवार को है.

Ashadh Yogini Ekadashi 2024 Date:
Ashadh Yogini Ekadashi 2024 Date:- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Ashadh Yogini Ekadashi 2024 Date: हर साल आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस बार योगिनी एकादशी 02 जूलाई 2024 मंगलवार को है. इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा की जाती है. योगिनी एकादशी व्रत का अपना विशेष महत्व है. मान्यता है कि योगिनी एकादशी का व्रत विधि-विधान से करने पर 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल मिलता है. योगिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने वाले भक्तों को पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है. साथ ही इस व्रत को करने वाले लोगों को मृत्यु के बाद भगवान विष्णु के चरणों में स्थान मिलता है. चलिए जानते हैं योगिनी एकादशी व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त इसके आलावा ऐसे में इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करें और व्रत कथा जरूर पढ़ें. योगिनी एकादशी व्रत कथा इस प्रकार है... 
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योगिनी एकादशी 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त (Yogini Ekadashi 2024 Date And Auspicious Time)

ज्योतिषाचार्यों की मानें तो आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 01 जुलाई को सुबह 10:26 बजे से शुरू होकर अगले दिन यानी 02 जुलाई को सुबह 08:42 बजे समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि को माना जाता है। ऐसे में योगिनी एकादशी 02 जुलाई को मनाई जाएगी। वैष्णव समाज के लोग भी 02 जुलाई को योगिनी एकादशी मनाएंगे। इस दिन दुर्लभ धृति योग बन रहा है। शिव योग पूरी रात तक रहेगा।

योगिनी एकादशी का महत्व (Importance of Yogini Ekadashi)

योगिनी एकादशी का व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है। पौराणिक मान्यता  के अनुसार, कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति यदि योगिनी एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और नियम से करे तो उसका रोग शीघ्र ही दूर हो जाता है। इस व्रत को करने से पापों का नाश होता है। जीवन में सुख की प्राप्ति होती है और इस लोक के बाद मनुष्य को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
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योगिनी एकादशी पूजा विधि (Yogini Ekadashi Puja Vidhi)

- योगिनी एकादशी व्रत के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पीले वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें। फिर हाथ में चावल, जल और फूल लेकर योगिनी एकादशी व्रत और पूजा का संकल्प लें।


- इस दौरान "ॐ भगवते वासुदेवाय नमः" मंत्र का जाप करते रहें। फिर विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम आदि का पाठ करें। इस दिन योगिनी एकादशी व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।

- इसके बाद घी के दीपक या कपूर से भगवान विष्णु की आरती करें। विष्णु जी से अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें। इसके बाद पूरा दिन फलाहार पर व्यतीत करें। शाम को स्नान करके फिर से विष्णु जी की आरती करें।

-फिर अगले दिन सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में योगिनी एकादशी व्रत का पारण करें। मान्यता के अनुसार इन नियमों का सही तरीके से पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा आप पर बनी रहेगी।
पूजा के शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को आसन पर स्थापित करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराकर उनका श्रृंगार करें। उन्हें वस्त्र, पीले फूल, फल, माला, चंदन, धूप, दीप, साबुत चावल, चीनी, हल्दी, तुलसी के पत्ते, पान, सुपारी आदि अर्पित करें।

योगिनी एकादशी व्रत कथा (Yogini Ekadashi Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार स्वर्ग धाम में अलकापुरी नामक नगर में कुबेर नाम का एक राजा रहता था। वह शिव का भक्त था और प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा करता था। हेम नाम का एक माली राजा के लिए पूजा के लिए फूल लाया करता था। हेम की विशालाक्षी नाम की एक सुंदर पत्नी थी। एक दिन वह मानसरोवर से फूल लाया, लेकिन कामी होने के कारण वह अपनी पत्नी के साथ विनोद और प्रणय करने लगा। इधर राजा ने दोपहर तक उसका इंतजार किया। अंत में राजा कुबेर ने अपने सेवकों को आदेश दिया कि जाकर माली के न आने का कारण पता करो, क्योंकि वह अभी तक फूल लेकर नहीं आया था। सेवकों ने कहा कि महाराज, वह पापी और अत्यंत कामी व्यक्ति है, अवश्य ही अपनी पत्नी के साथ विनोद कर रहा होगा। यह सुनकर कुबेर क्रोधित हो गए और उसे बुलाया। माली हेम प्रकट हुआ।
राजा कुबेर क्रोधित होकर बोले- तुमने मेरे सबसे पूज्य देव भगवान शिव का अनादर किया है, इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूं कि तुम अपनी पत्नी का वियोग सहोगे और मृत्युलोक में कोढ़ी बनोगे। कुबेर के श्राप के कारण हेम माली उसी क्षण स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर आ गिरा। पृथ्वी पर आते ही उसे श्वेत कोढ़ हो गया। उसकी पत्नी भी उसी समय अदृश्य हो गई। मृत्युलोक में आने के बाद माली पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वह बिना अन्न-जल के वन में भटकता रहा। उसे रात में नींद नहीं आती थी, परंतु भगवान शिव की आराधना के प्रभाव से उसे अपना पिछला जन्म अवश्य याद आ गया।

भटकते-भटकते एक दिन वह मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में पहुंचा, जो ब्रह्मा से भी अधिक उम्र के थे और जिनका आश्रम ब्रह्मा की सभा के समान प्रतीत होता था। हेम माली वहां गया और उनके चरणों में गिर पड़ा। उसे देखकर मार्कण्डेय ऋषि बोले, तुमने ऐसा कौन-सा पाप किया है, जिसके कारण तुम्हारी यह दशा हो गई है। हेम माली ने सारी कथा कह सुनाई। यह सुनकर ऋषि बोले- तुमने मेरे सामने सत्य वचन कहे हैं, इसलिए तुम्हारे उद्धार के लिए मैं तुम्हें एक व्रत बता रहा हूं। यदि तुम आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करोगे, तो तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो जाएंगे। यह सुनकर हेम माली बहुत प्रसन्न हुआ और ऋषि को दण्डवत प्रणाम किया। ऋषि ने उसे स्नेहपूर्वक पाला। ऋषि की सलाह के अनुसार हेम माली ने योगिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक किया। इस व्रत के प्रभाव से वह अपने पूर्व स्वरूप में आ गया और अपनी पत्नी के साथ सुखपूर्वक रहने लगा।
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