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Sawan Somwar 2024: जानिए क्यों खास है सावन में सोमवार का व्रत? क्या है इसका महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Thu, 27 Jun 2024 04:02 PM IST
सार

Shravan Month 2024: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। यह शिव और महादेव के भक्तों का हुत ही प्रिय महीना होता है। इस साल 22 जुलाई 2024 दिन सोमवार कोश्रावण मास की शुरुआत होने जा रही है ।

Sawan Somwar 2024
Sawan Somwar 2024- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Shravan Month 2024: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। यह शिव और महादेव के भक्तों का हुत ही प्रिय महीना होता है। इस साल 22 जुलाई 2024 दिन सोमवार कोश्रावण मास की शुरुआत होने जा रही है । सावन के महीने में हर दिन भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने का विधान होता है। ऐसा माना जाता है कि जब सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में निद्रा के लिए चले जाते हैं तब सृष्टि का भार भगवान शंकर अपने कंधों पर उठा लेते हैं। आपको बता दें की 22 जुलाई से सावन का महीना आरंभ होगा और 15 अगस्त को सावन का अंतिम दिन होगा। आइए जाते हैं इस बार सावन के महीने की खास-खास बातें...
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सावन के सोमवार का महत्व (Importance Of Monday Of Sawan)

कहते हैं कि सावन सोमवार का व्रत रखने से मन की सबी मनोकामना पूरी हो जाती है। विवाहित महिलाओं को सौभाग्यवती होने का वरदान मिलता है और पति को लंबी आयु प्राप्त होती है। वहीं, अगर अविवाहित लड़कियां यह व्रत रखें तो उन्हें योग्य वर की प्राप्ति होती है।

सावन में क्यों की जाती है भोलेनाथ की पूजा? 
(Why Is Bholenath Worshipped In The Month Of Sawan?)

पौराणिक कहानी के अनुसार, जब शिव  शंकर की पहली पत्नी देवी सती ने अपने पिता के घर में अपने पति शिव का अपमान होते देखा तो वे इसे बर्दाश्त नहीं कर पाईं और उन्होंने राजा दक्ष के यज्ञ कुंड में अपनी देह त्याग दी। इसके बाद उन्होंने हिमालय की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती के रूप में उन्होंने भगवान शिव को अपना पति चुना और उन्हें पाने के लिए बहुत तपस्या की। कहते हैं कि सावन के महीने में शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसके बाद माता पार्वती का विवाह भगवान शिव शंकर से हुआ। तब से यह पूरा महीना शिव और माता पार्वती दोनों का प्रिय महीना बन गया। क्योंकि  सोमवार का दिन महादेव और माता पार्वती को समर्पित है, इसलिए उनके प्रिय महीने सावन में पड़ने वाले सोमवार का महत्व और भी बढ़ जाता है। जो शिव भक्त आमतौर पर सोमवार का व्रत नहीं रखते हैं, वे भी सावन सोमवार का व्रत जरूर रखते हैं।
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 सोमवार को कैसे करें शिव शंकर की पूजन  (Somwar Vrat Puja Vidhi)

सोमवार व्रत के दिन भक्तों को सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान भोलेनाथ की पूजा का संकल्प लेना चाहिए और फिर आप आपने घर के मंदिर के सामने एक मंच बनाकर महादेव और माता पार्वती की मूर्ति रख दें यादि आपके पास मूर्ति नहीं है तो आप माता  पार्वती और शिव शंकर का एक चित्र भी लगा सकते है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती को चंदन से तिलक लगाएं, उन्हें रोली, अक्षत चढ़ाएं और सुपारी चढ़ाएं। इसके बाद उन्हें फल, फूल आदि अर्पित करें और आरती करें। इसके बाद मंदिर में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक अवश्य करना चाहिए। भगवान शिव को पंचामृत और मिश्री आदि का भोग लगाने की बात कही जाती है। भगवान शिव को मालपुए बहुत पसंद हैं और आप मालपुए बनाकर भगवान शिव को भोग लगा सकते हैं।

 क्या है सोमवार के व्रत नियम (Somvar Vrat Niyam)

- अगर आप सोमवार व्रत रखने की योजना बना रहे हैं, तो आपको इससे जुड़े नियम जरूर जानने चाहिए।
- सोमवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सबसे पहले उठकर स्नान करना चाहिए।
- इसके बाद भगवान शिव को जल और बेलपत्र चढ़ाना चाहिए। साथ ही शिव-गौरी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए।
- शिव पूजन के बाद सोमवार व्रत कथा सुननी चाहिए। सोमवार व्रत के दौरान एक बार ही भोजन करना चाहिए। आमतौर पर सोमवार का व्रत तीसरे दिन तक रखा जाता है।

 
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