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Sawan 2024: सावन में कैसे करें शिवलिंग की पूजा? जानिए शिव पूजन की सही विधि

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Thu, 04 Jul 2024 02:57 PM IST
सार

Sawan 2024: इस बार सावन की शुरुआत और अंत दोनों सोमवार को हो रहा है इसलिए कुल 5 व्रत आएंगे। सावन 22 जुलाई सोमवार से शुरू होकर 19 अगस्त सोमवार को ही पूर्ण होने जा रहा है

Sawan 2024
Sawan 2024- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Sawan 2024: भगवान् शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद पवित्र माह होता है। इस पूरे महीनें शिव की सेवा करने से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती है। इस बार सावन की शुरुआत और अंत दोनों सोमवार को हो रहा है इसलिए कुल 5 व्रत आएंगे। सावन 22 जुलाई सोमवार से शुरू होकर 19 अगस्त सोमवार को ही पूर्ण होने जा रहा है। आज इस लेख में हम आपको, शिवलिंग के पूजन की विधि बताने जा रहे है। 
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जो भगवान शंकर का सुखमय, निर्मल एवं सनातन रूप है, उसका उत्तम भक्ति भाव से पूजन करें। इससे समस्त मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी। दरिद्रता, रोग, दुख तथा शत्रु जनित पीड़ा, यह चार प्रकार के कष्ट तभी तक रहते हैं जब तक मनुष्य भगवान शिव का पूजन नहीं करता। भगवान शिव की पूजा होते ही सारे दुख विलीन हो जाते हैं। और समस्त सुखों की प्राप्ति हो जाती है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र भी संपूर्ण कामनाओं तथा प्रयोजनों की सिद्धि के लिए क्रम से विधि के अनुसार भगवान शंकर की पूजा करें। 

भगवान शिव की पूजा विधि  (Shiv Pujan Vidhi)

प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गुरु तथा शिव का स्मरण करके तीर्थों का चिंतन एवं भगवान विष्णु का ध्यान करें। पूजन सामग्री लेकर सुंदर आसन पर बैठे। पहले न्यास आदि करके क्रम से हर महादेव जी की पूजा करें। शिव की पूजा से पहले गणेश जी की, द्वारपालों की और दिग्पालों की भी भली-भांति पूजा करके पीछे देवता के लिए पीठ स्थान की कल्पना करें अथवा अष्टदल कमल बना कर पूजा द्रव्य के समीप बैठे और उस कमल पर ही भगवान शिव को समाशीन करें। 
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तत्पश्चात 3 आचमन करके पुनः दोनों हाथ धोकर 3 प्रणायाम करके मध्यम प्रणव अर्थात कुंभक करते समय त्रिनेत्र धारी भगवान शिव का इस प्रकार ध्यान करें- उनके पांच मुख है, 10 भुजाएं हैं, शुद्ध स्फटिक के समान कांति है, सब प्रकार के आभूषण उनके श्री अंगों को विभूषित करते हैं। तथा वे व्याघ्र चर्म की चादर ओढ़े हुए हैं। इस तरह ध्यान करके यह भावना करें कि मुझे भी इनके समान ही रूप प्राप्त हो जाए। 

ऐसी भावना करके मनुष्य सदा के लिए अपने पाप को भस्म कर डाले। इस प्रकार भावना द्वारा शिव का ही शरीर धारण करके उन परमेश्वर की पूजा करें। पंचगव्य निर्माण की विधि से पांचों दर्व्यों को एक पत्र में लेकर प्रणव से ही अभिमंत्रित करके उन मिश्रित गव्य पदार्थों द्वारा भगवान को नहलाएं। 

सावन में इस विधि से करें शिवलिंग की पूजा? 

(Should you worship Shivlinga in this manner in the month of Shravan?)

तत्पश्चात प्रथक प्रथक दूध, दही,मधु, घी, गन्ने के रस से नहलाकर समस्त अभिष्टों के दाता और हितकारी पूजनीय महादेव जी का प्रणव के उच्चारण पूर्वक पवित्र द्रव्यों द्वारा अभिषेक करें। पवित्र जल पात्रों में मंत्रोच्चारण पूर्वक जल डालें। डालने से पहले साधक श्वेत वस्त्र से उस जल को यथोचित रीति से छान लें। उस जल को तब तक दूर न करें जब तक ईष्ट देव को चंदन न चढ़ा दे। 

तब सुन्दर द्वारा प्रसन्नता पूर्वक शंकर जी की पूजा करें। उनके ऊपर कुश, अपामार्ग, कपूर, चमेली, चंपा, कनेर, कमल आदि चढाएँ और पूजा करें।परमेश्वर शिव के ऊपर जल की धारा की व्यवस्था करें, जल के द्वारा मंत्रोच्चारण पूर्वक पूजा करनी चाहिए यह समस्त फलों को देने वाली होती है।

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