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Navratri 2024 4th Day: नवरात्रि के चौथे दिन इस विधि से करें मां कूष्मांडा की पूजा, मिलेगी रोगों से मुक्ति

jeevanjali Published by: निधि Updated Thu, 11 Apr 2024 06:41 PM IST
सार

Navratri 2024 4th Day: कल चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। कल के दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। यह माँ आदिशक्ति का चौथा रूप है। सूर्य के समान ही तेज माना जाता है। इस दिन माँ की इस विशेष पूजा का बहुत बड़ा महत्व है।

Navratri 2024 4th Day: 
Navratri 2024 4th Day: - फोटो : JEEVANJALI

विस्तार

Navratri 2024 4th Day: कल चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन है। कल के दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। यह माँ आदिशक्ति का चौथा रूप है। सूर्य के समान ही तेज माना जाता है। इस दिन माँ की इस विशेष पूजा का बहुत बड़ा महत्व है। ऐसा माना जाता है कि देवी के हाथों में जो अमृत कलश होता है वह अपने भक्तों को दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करता है। मां कुष्मांडा के बारे में यह भी प्रमाणित है कि वह सिंह की सवारी करते हैं जो धर्म का प्रतीक है। संपूर्ण विधि-विधान से पूजा करने के बाद मां कूष्मांडा के मंत्रों का जाप किया जाए तो वह अत्यंत प्रसन्न होती है और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती है। माँ के स्वरूप का वर्णन इस प्रकार से किया जाता है माँ के अष्ट भुजाएँ जो जीवन में कर्म करने का संदेश देते हैं। उनकी मुस्कान में यह कहा गया है कि हमें हर परिस्थिति का हंसकर ही सामना करना चाहिए। आइए जानते हैं मां की पूजा विधि और मंत्र जाप के बारे में।

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मां कूष्माण्डा का स्वरूप 
मां कूष्माण्डा की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। मां कुष्मांडा को कुम्हड़े की बलि अति प्रिय है और संस्कृत में कुम्हड़े को कूष्माण्ड कहते हैं। इसीलिए मां दुर्गा के इस स्वरुप को कूष्माण्डा कहा जाता है।

पूजा करने से मिलता है ये फल
देवी कुष्मांडा अपने भक्तों को रोग, शोक और विनाश से मुक्त कर उन्हें आयु, यश, बल और बुद्धि प्रदान करती हैं। मां कुष्मांडा बहुत कम सेवा और भक्ति से भी प्रसन्न होने वाली हैं। यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से इनकी शरण में आ जाए तो उसे आसानी से परम पद की प्राप्ति हो सकती है। जो लोग अपनी लौकिक एवं आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं उन्हें इनकी आराधना में सदैव तत्पर रहना चाहिए। यदि प्रयासों के बावजूद भी इच्छित फल की प्राप्ति नहीं हो पाती है तो कुष्मांडा स्वरूप की पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होने लगते हैं।

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मां कूष्मांडा की पूजा विधि
- चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को सुबह स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। 
- इसके बाद मां कूष्मांडा का स्मरण करके उनको धूप, गंध, अक्षत्, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान अर्पित करें। 
- अब मां कूष्मांडा को हलवा और दही का भोग लगाएं। फिर उसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण कर सकते हैं। 
- पूजा के अंत में मां कूष्मांडा की आरती करें। 

ये है मां कुष्मांडा के मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

वन्दे वाञ्छित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्मांडा यशस्विनीम्॥

सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्मा याम कूष्मांडा शुभदास्तु मे।।
ॐ कूष्माण्डायै नम:।।

ध्यान मंत्र 

भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥

पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥

प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
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