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Sankashti Chaturthi 2024: आषाढ़ मास की पहली संकष्टी चतुर्थी कब ? जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व

जीवांजलि Published by: निधि Updated Thu, 20 Jun 2024 08:00 AM IST
सार

Sankashti Chaturthi 2024:आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को कृष्णपिंगल चतुर्थी कहते हैं. इस बार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 25 जून, मंगलवार को है. 

Sankashti Chaturthi 2024
Sankashti Chaturthi 2024- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Sankashti Chaturthi 2024: हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. वहीं आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को कृष्णपिंगल चतुर्थी कहते हैं. इस बार कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 25 जून, मंगलवार को है. हर माह की चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित होती है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा का विधान है. इस दिन भक्त सुख, शांति और समृद्धि के लिए एकदंत दयावंत चतुर्भुज भगवान श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा करते हैं. भगवान गणेश भक्तों के लिए विघ्नहर्ता माने जाते हैं. कहा जाता है कि विघ्नहर्ता की पूजा करने से भक्तों के सभी संकट दूर हो जाते हैं. गणेश जी प्रथम पूजनीय हैं और शुभता के प्रतीक भी हैं. मान्यता है कि इस दिन गणपति की पूजा और व्रत करने से ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति होती है. तो आइए जानते हैं शुभ फल पाने के लिए एकदंत संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि के बारे में...
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कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी कब है? 

पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 24-25 जून की रात 1:23 बजे से शुरू होकर 25 जून को रात 11:10 बजे समाप्त होगी। ऐसे में कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का व्रत 25 जून को रखा जाएगा।

संकष्टी चतुर्थी पूजन विधि

संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रातः काल उठकर स्नानादि करने के पश्चात पूजा स्थान की साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़कें।
फिर भगवान गणेश को वस्त्र पहनाएं और मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
सिंदूर से गणेश जी का तिलक करें व पुष्प अर्पित करें। इसके बाद भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठ अर्पित करें।
गणेश जी को घी के मोतीचूर के लड्डू या मोदक का भोग लगाएं। 
पूजा समाप्त होने के बाद आरती करें और पूजन में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगे।

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी महत्व

आषाढ़ माह का कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी का व्रत सभी कार्यों में सिद्धि प्राप्ति के लिए अचूक माना गया है। जो व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है उसकी संतान संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही धन और कर्ज संबंधी समस्याओं का भी समाधान होता है। 
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पढ़ें ये आरती 


जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती
पिता महादेवा ॥
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