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Kalashtami June 2024: कब है आषाढ़ माह की कालाष्टमी? जानिए तिथि, पूजा विधि और महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Sat, 22 Jun 2024 05:30 AM IST
सार

Ashadh Month Kalashtami 2024: हिंदी पंचांग के अनुसार हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है. कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. इस बार कालाष्टमी व्रत 28 जून 2024 को रखा जाएगा।

Ashadh Month Kalashtami 2024
Ashadh Month Kalashtami 2024- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Ashadh Month Kalashtami 2024: हिंदी पंचांग के अनुसार हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी व्रत रखा जाता है. कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. इस बार कालाष्टमी व्रत 28 जून 2024 को रखा जाएगा. यह तिथि भगवान काल भैरव को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरव भगवान शिव के रूद्र अवतार हैं. इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है. भगवान भैरव के आठ रूप हैं, जिनमें से गृहस्थ जीवन जीने वाले सामान्य लोगों को बटुक भैरव की पूजा करनी चाहिए. ये भगवान भैरव का सौम्य रूप हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भी भगवान भैरव के भक्तों को कष्ट पहुंचाता है, उसे तीनों लोकों में कहीं भी शरण नहीं मिलती. इनकी पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों, भय और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है. तो चलिए जानते हैं कालाष्टमी व्रत का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

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आषाढ़ माह में कब है कालाष्टमी 2024?

हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 28 जून को शाम 4:27 बजे से शुरू होकर 29 जून को दोपहर 2:19 बजे समाप्त होगी। काल भैरव की पूजा निशिता काल में की जाती है, इसलिए इस महीने कालाष्टमी 28 जून, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन कालाष्टमी व्रत और काल भैरव की पूजा की जाएगी।

कालाष्टमी का महत्व

धर्मग्रंथों में भगवान काल भैरव को शिवजी का उग्र स्वरूप माना गया है। इनकी उपासना से व्यक्ति को जीवन के सभी दुखों से छुटकारा मिलता है और घर में खुशियों का आगमन होता है। कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा करने से भक्तों को किसी भी तरह के भय, रोग, शत्रु और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। साथ ही किसी भी तरह का वाद विवाद, कोर्ट कचहरी के मामलों से छुटकारा पाने में भी भगवान काल भैरव आपकी मदद करते हैं। इनकी पूजा-अर्चना करने से राहु केतु के बुरे दोष से भी मुक्ति मिलती है। इनकी पूजा-आराधना से घर में नकारात्मक शक्तियां, जादू-टोने और भूत-प्रेत आदि से किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता बल्कि इनकी उपासना से मनुष्य का आत्मविश्वास बढ़ता है।
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कालाष्टमी पूजा विधि-

अष्टमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। अब मंदिर की सफाई करें और भगवान के सामने दीपक जलाएं। भगवान काल भैरव के साथ-साथ भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद पूरे दिन व्रत रखें और रात में फिर से पूजा करें। रात में भगवान काल भैरव की पूजा करने का विधान है। धूप, काले तिल, दीप, उड़द और सरसों के तेल से काल भैरव की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही उन्हें हलवा, मीठी पूरी और जलेबी आदि का भोग लगाना चाहिए। वहीं बैठकर भैरव चालीसा का पाठ करें। पाठ पूरा होने के बाद आरती करें।

कालाष्टमी के दिन करें ये उपाय

- लंबे समय से चली आ रही किसी भी समस्या से छुटकारा पाने के लिए कालाष्टमी के दिन एक रोटी लें और उस पर घी की जगह सरसों का तेल लगाएं और फिर इस रोटी को काले कुत्ते को खाने के लिए दें। इस दौरान काल भैरव का ध्यान करते रहें।

- जीवन में चल रही पारिवारिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान शिव की मूर्ति के सामने आसन पर बैठकर शिव चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि पूरी श्रद्धा के साथ ऐसा करने से भक्तों को बहुत लाभ होता है।

- जीवन में सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं पाने के लिए कालाष्टमी के दिन काल भैरव की मूर्ति के सामने सरसों के तेल से भरा मिट्टी का दीपक जलाएं। जब आप दीपक जलाएं तो “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ” मंत्र का दो बार जाप करें।

- अगर जीवन में हमेशा किसी चीज की कमी रहती है तो इसे दूर करने के लिए कालाष्टमी के दिन काल भैरव के चरणों में काला धागा अर्पित करना चाहिए और काल भैरव का ध्यान करना चाहिए। फिर कुछ देर बाद इस धागे को काल भैरव के चरणों से उठाकर अपने दाएं पैर में बांध लें।

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