विज्ञापन
Home  dharm  vinayak chaturthi 2024 how to worship on vinayak chaturthi know the complete method

Vinayak Chaturthi 2024: किस विधि से करें विनायक चतुर्थी के दिन पूजा? जानिए पूरी विधि

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Sun, 07 Jul 2024 05:00 AM IST
सार

 Vinayak Chaturthi 2024: चतुर्थी तिथि भगवान शिव के पुत्र गणपति बप्पा को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। इस बार विनायक चतुर्थी आषाढ़ माह में 09 जुलाई को है।

विनायक चतुर्था
विनायक चतुर्था- फोटो : jeevanjali

विस्तार

 Vinayak Chaturthi 2024: चतुर्थी तिथि भगवान शिव के पुत्र गणपति बप्पा को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। इस बार विनायक चतुर्थी आषाढ़ माह में 09 जुलाई को है। विनायक चतुर्थी के पावन अवसर पर भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही शुभ फलों की प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कब है विनायक चतुर्थी Kab Hai Vinayak Chaturthi 

पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 06 बजकर 08 मिनट से शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी सुबह 07 बजकर 51मिनट  बजे होगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 09 बजकर 58 मिनट है। साधक 09 जुलाई को व्रत रख सकते हैं।

किस विधि से करें विनायक चतुर्थी पर पूजा  Kis Vidhi Se Karen Vinayak Chatutthi Par Pooja

देवी-देवताओं के ध्यान से विनायक चतुर्थी के दिन की शुरुआत  करें। 
इसके बाद स्नान करें और हरे रंग के कपड़े पहनें क्योंकि भगवान गणेश को हरा रंग प्रिय है। 
इसके बाद मंदिर की साफ-सफाई करें 
और भगवान गणेश की मूर्ति को एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। 
अब भगवान को फल, फूल, धूप आदि अर्पित करें।
 इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाकर आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ करें।
 साथ ही मंत्रों का जाप करें। 
भगवान से सुख-समृद्धि और धन-संपत्ति में वृद्धि की प्रार्थना करें। 
मोदक का भोग लगाएं और लोगों में प्रसाद बांटें। 
इसके अलावा पूजा के बाद अपनी श्रद्धानुसार जरूरतमंदों को अन्न, धन और वस्त्र दान करें।
विज्ञापन

इन मंत्रों का करें जप

भगवान गणेश के मंत्र

ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।

निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥

गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥

ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥


गणेश जी की आरती (Ganesh Ji Ki Aarti )


जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

'सूर' श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

यह भी पढ़ें:-
Unluck Plants for Home: शुभ नहीं, बल्कि अशुभ माने जाते हैं ये पौधे ! घर में लगाने से आती है दरिद्रता
Garuda Purana : गरुण पुराण क्या है, क्यों किया जाता है इसका पाठ? जानिए
Panchmukhi Shiv: भगवान शिव के क्यों है पांच मुख? जानिए इन 5 मुख का रहस्य
विज्ञापन