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Vat Purnima 2024: क्या है वट पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व, जानिए

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Tue, 18 Jun 2024 05:49 PM IST
सार

Vat Purnima 2024: वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और संतान प्राप्ति के लिए सोलह श्रृंगार करके यह व्रत रखती हैं।

वट पूर्णिमा व्रत
वट पूर्णिमा व्रत- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Vat Purnima 2024: वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और संतान प्राप्ति के लिए सोलह श्रृंगार करके यह व्रत रखती हैं। इस दिन सावित्री और सत्यवान की पूजा की जाती है। पश्चिमी भारत में यह व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। जबकि उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है।
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वट सावित्री पूर्णिमा 2024 कब है? When is Vat Savitri Purnima 2024?

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा 21 जून को सुबह 7:32 मिनट पर शुरू हो रही है, जो 22 जून को सुबह 6:38 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में वट सावित्री पूर्णिमा व्रत 21 जून 2024, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

वट सावित्री पूर्णिमा पूजा का शुभ मुहूर्त Vat Saavitree Poornima Pooja Ka Shubh Muhoort

लाभ चौघड़िया मुहूर्त- सुबह 7:08 मिनट  से 8:53 मिनट तक
अमृत चौघड़िया मुहूर्त- सुबह 8:53 मिनट  से 10:38 मिनट तक
शुभ चौघड़िया मुहूर्त- दोपहर 12:23 मिनट से 2:07 मिनट तक

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वट पूर्णिमा व्रत का धार्मिक महत्व Vat Saavitree Poornima  Ka Dhaarmik Mahatv

वट पूर्णिमा की महिमा का वर्णन कई हिंदू ग्रंथों जैसे स्कंद पुराण, निर्णयामृत और भविष्योत्तर पुराण में किया गया है। वट सावित्री पूर्णिमा का ज्येष्ठ अमावस्या की वट सावित्री की तरह ही विशेष महत्व है। इस दिन विवाहित महिलाएं सोलह श्रृंगार करके अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और संतान प्राप्ति के लिए बरगद के पेड़ की विधिवत पूजा करती हैं और कच्चा धागा बांधती हैं। इसके साथ ही मां पार्वती और सावित्री की मूर्ति बनाकर उनकी विधिवत पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली हर समस्या समाप्त होती है और सुख, समृद्धि और खुशहाल वैवाहिक जीवन का वरदान मिलता है। वट पूर्णिमा व्रत न केवल विवाहित जोड़ों के बीच के बंधन को मजबूत करता है, बल्कि यह नारीत्व की भावना का भी सम्मान करता है। इस व्रत के प्रति आस्था ही इसे इतना पवित्र और शुभ बनाती है।

वट पूर्णिमा व्रत पूजा विधि Vat Purnima Vrat Puja Vidhi

इस दिन महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान कर नए कपड़े पहनने चाहिए और सोलह श्रृंगार करना चाहिए। शाम के समय वट सावित्री की पूजा के लिए व्रती विवाहित महिलाओं को बरगद के पेड़ के नीचे सच्चे मन से सावित्री देवी की पूजा करनी चाहिए। पूजा के लिए महिलाओं को एक टोकरी में सारी पूजा सामग्री रखनी होती है और पेड़ के नीचे जाकर पेड़ की जड़ों में जल डालना होता है।

इसके बाद पेड़ को प्रसाद चढ़ाना चाहिए और धूप-दीप दिखाना चाहिए। इस दौरान हाथ के पंखे से वट वृक्ष को हवा करें और आशीर्वाद पाने के लिए मां सावित्री की पूजा करें। इस प्रक्रिया के बाद विवाहित महिलाओं को अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हुए बरगद के पेड़ के चारों ओर 7 बार कच्चा धागा या मोली बांधना चाहिए। अंत में बरगद के पेड़ के नीचे सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें। इसके बाद घर आकर उसी पंख से अपने पति को हवा करें और उनका आशीर्वाद लें। फिर प्रसाद के रूप में चढ़ाए गए फलों को खाएं और शाम को मीठे भोजन के साथ अपना व्रत खोलें।

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