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Vat Purnima 2024 Date: किस दिन मनाई जाएगी वट पूर्णिमा, जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Tue, 18 Jun 2024 05:06 AM IST
सार

Vat Purnima 2024 Date:  वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वट पूर्णिमा व्रत महिलाओं के लिए सौभाग्य लेकर आता है। बच्चों और पति की उम्र बढ़ती है।

वट पूर्णिमा 2024 तिथि:
वट पूर्णिमा 2024 तिथि:- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Vat Purnima 2024 Date:  वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वट पूर्णिमा व्रत महिलाओं के लिए सौभाग्य लेकर आता है। बच्चों और पति की उम्र बढ़ती है। इस व्रत के प्रभाव से जाने अनजाने में किए गए पाप भी समाप्त हो जाते हैं। वट यानि बरगद को देव वृक्ष माना जाता है। इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विधान है। इस साल 2024 में वट वृक्ष के दिन कई शुभ संयोग बन रहे हैं। वट पूर्णिमा व्रत, ऐसे में सुहागिन महिलाओं को इसका लाभ मिलेगा। आइए आपको बताते हैं इस साल कब मनाया जाएगा वट पूर्णिमा व्रत
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वट पूर्णिमा व्रत 2024 तिथि

22 जून 2024 को वट पूर्णिमा व्रत है।  महिलाएं इस दिन अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए  और पति की लंबी आयु की कामना के लिए सूर्योदय से व्रत रखती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा और परिक्रमा करती हैं। 

वट पूर्णिमा व्रत 2024 मुहूर्त

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 21 जून 2024 को सुबह 07:31 बजे शुरू होगी और 22 जून 2024 को सुबह 06:37 बजे समाप्त होगी।

स्नान-दान - सुबह 07.31 बजे के बाद
पूजा मुहूर्त - सुबह 07.31 बजे - 10.38 बजे
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वट पूर्णिमा 2024 शुभ संयोग


वट पूर्णिमा के दिन शुभ योग, त्रिग्रही योग, बुधादित्य योग, शुक्रादित्य योग का संयोग बन रहा है। इन 4 शुभ संयोगों में पूजा करने से सुहागिनों को पुण्य फल की प्राप्ति होगी।

शुभ योग - 20 जून 2024, 08.13 बजे - 21 जून 2024, 06.42 बजे
शुक्रादित्य योग
बुधादित्य योग
त्रिग्रही योग

सुहागिन महिलाएं क्यों रखती हैं वट सावित्री व्रत

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावित्री ने मृत्यु के देवता भगवान यम को अपने पति के प्राण लौटाने के लिए मजबूर किया था अपने तप और सतीत्व के बल से पति सत्यवान को प्राप्त करने के लिए विवाहित महिलाएं अपने पति की सुरक्षा और लंबी आयु के लिए वट सावित्री व्रत रखती हैं।

वट सावित्री पूर्णिमा 2024 का महत्व

वट पूर्णिमा की महिमा का वर्णन स्कंद पुराण जैसे कई हिंदू ग्रंथों में किया गया है , निर्णयामृत और भविष्योत्तर पुराण। ज्येष्ठ अमावस्या की वट सावित्री की तरह ही वट सावित्री पूर्णिमा का भी विशेष महत्व है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और संतान प्राप्ति के लिए वट वृक्ष की विधिवत पूजा करने के साथ कच्चा धागा बांधती हैं। साथ ही मां पार्वती और सावित्री की मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर होती हैं और सुख, समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

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