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Types of Mala: माला कितने प्रकार की होती है,जानिए इनके लाभ

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Sun, 23 Jun 2024 07:08 AM IST
सार

Types of Mala: धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल की जाने वाली मालाएं न केवल धर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनसे कई कार्य पूरे किए जा सकते हैं और स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त किए जा सकते हैं। 

माला कितने प्रकार की होती है
माला कितने प्रकार की होती है- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Types of Mala: धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल की जाने वाली मालाएं न केवल धर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनसे कई कार्य पूरे किए जा सकते हैं और स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त किए जा सकते हैं। आध्यात्म और स्वास्थ्य की दृष्टि से निम्नलिखित मालाओं का उपयोग किया जाता है। आइए आपको बताते हैं कि मालाएं कितने प्रकार की होती हैं
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मालाएं कितने प्रकार की होती हैं

कमलगट्टे की माला: हिंदू धर्म में धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए कमल के बीज की माला का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा मां बगलामुखी और मां कालका की पूजा में भी कमल के बीज की माला का उपयोग किया जाता है।

मोती की माला: मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है जो मन का कारक है। हिंदू मान्यता के अनुसार मोती की माला मन की शांति के साथ चंद्र ग्रह की शुभता और सौभाग्य के लिए पहनी जाती है।
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तुलसी की माला: अगर आप गले या कलाई पर तुलसी की माला पहनना चाहते हैं तो आपको इसकी पवित्रता का पूरा ध्यान रखना होगा। भगवान विष्णु की कृपा बरसाने वाली इस माला को पहनने वाले व्यक्ति को तामसिक चीजों से हमेशा दूरी बनाकर रखनी होती है, अन्यथा पुण्य की जगह उसे पाप मिलता है, जिसके कारण उसे तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

वैजयंती माला: हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण के भक्त अक्सर वैजयंती माला पहनते हैं क्योंकि यह माला मुरली मनोहर को बहुत प्रिय थी। ज्योतिष के अनुसार वैजयंती माला पहनने से शनि दोष नहीं लगता है।

स्फटिक माला: हिंदू धर्म के अनुसार अगर कोई व्यक्ति स्फटिक माला पहनता है तो उसे शुक्र ग्रह से संबंधित शुभता प्राप्त होती है। ज्योतिष के अनुसार शुक्र से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए इस माला को शुभ माना जाता है।

रुद्राक्ष माला: हिंदू धर्म में रुद्राक्ष माला को भगवान शिव का महाप्रसाद माना जाता है। यही कारण है कि हर शिव भक्त इसे पहनना अपना सौभाग्य मानता है, लेकिन इसे पहनने के लिए भी पवित्रता का पूरा ध्यान रखना पड़ता है। हिन्दी मान्यता के अनुसार रुद्राक्ष की माला को शौच या संभोग आदि करते समय उतारकर पवित्र स्थान पर रखना चाहिए।



हल्दी की माला - तुलसी की माला देवगुरु बृहस्पति और बगलामुखी की पूजा के लिए प्रयोग की जाती है।

सफेद चंदन की माला - यह माला भगवान विष्णु की कृपा पाने और राहु के दोष को दूर करने के लिए पहनी जाती है।

मोती की माला - मोती की माला चंद्र ग्रह की शुभता और मन की शांति के लिए बहुत शुभ परिणाम देती है।

लाल चंदन की माला - शक्ति की पूजा के लिए लाल चंदन की माला बहुत शुभ साबित होती है।

मूंगा की माला - यह माला मंगल ग्रह की शुभता पाने के लिए पहनी जाती है।

नवरत्न माला- नौ ग्रहों की शांति के लिए पहनी जाती है। इससे मानसिक शांति मिलती है।

माणिक की माला- सूर्य के मंत्र जाप के लिए शुभ है। इससे अर्थ सिद्ध होता है।
 

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