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Tilak: तिलक लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना है जरूरी, जानिए

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Sat, 22 Jun 2024 04:47 PM IST
सार

Tilak: यह हिंदू परंपरा में इस्तेमाल किया जाने वाला एक विशेष अनुष्ठान है। तिलक लगाए बिना न तो पूजा की अनुमति है और न ही पूजा पूरी होती है। तिलक भौंहों के बीच, गले या नाभि पर लगाया जाता है।

तिलक
तिलक- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Tilak: यह हिंदू परंपरा में इस्तेमाल किया जाने वाला एक विशेष अनुष्ठान है। तिलक लगाए बिना न तो पूजा की अनुमति है और न ही पूजा पूरी होती है। तिलक भौंहों के बीच, गले या नाभि पर लगाया जाता है। तिलक के जरिए यह भी पता चल सकता है कि आप किस संप्रदाय से हैं। तिलक लगाने से स्वास्थ्य बेहतर होता है, मन एकाग्र होता है और शांत होता है। आइए आपको बताते हैं कि तिलक लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
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क्या है तिलक लगाने के नियम

शास्त्रों में तिलक लगाने के नियम बताए गए हैं। किस उंगली से किसे तिलक लगाना सही माना जाता है, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

तर्जनी
तर्जनी उंगली के मूल में बृहस्पति पर्वत होता है। बृहस्पति को देव गुरु कहा जाता है और इसे अमरता का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए पूर्वजों का श्राद्ध आदि करते समय शरीर पर तर्जनी उंगली से तिलक लगाना चाहिए। इसके साथ ही मृत शरीर पर भी तर्जनी उंगली से तिलक लगाया जाता है। इस उंगली से कभी भी जीवित व्यक्ति को तिलक न लगाएं, इसे अशुभ माना जाता है। ऐसा करना आपके साथ-साथ उस व्यक्ति के लिए भी परेशानी खड़ी कर सकता है जिसे आपने तिलक लगाया है।

मध्यमा उंगली
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हमें मध्यमा उंगली से खुद को तिलक लगाना चाहिए। इस उंगली के मूल भाग में शनि पर्वत मौजूद होता है और ज्योतिष में शनिदेव को न्याय, रक्षक और आध्यात्म का कारक माना जाता है। अगर आप मध्यमा उंगली से खुद को तिलक लगाते हैं तो आपकी आयु बढ़ती है। यही वजह है कि खुद को हमेशा मध्यमा उंगली से ही तिलक लगाया जाता है।
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अनामिका उंगली
अनामिका उंगली का संबंध सूर्य देव से है, क्योंकि इसके मूल भाग में सूर्य पर्वत मौजूद होता है। इसलिए देवी-देवताओं की मूर्ति या तस्वीर पर इसी उंगली से तिलक लगाना चाहिए। इसके साथ ही धार्मिक कार्यों के दौरान भी इसी उंगली से तिलक लगाया जाता है। अनामिका उंगली के अलावा अगर आप किसी और उंगली से देवी-देवताओं की तस्वीर पर तिलक लगाते हैं तो आपको मनचाहा फल नहीं मिलता है।

अंगूठा

अंगूठे के मूल में शुक्र पर्वत होता है और शुक्र को सुख, वैभव, समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि मेहमानों को अंगूठे से तिलक लगाना चाहिए।

कनिष्ठिका
हाथ की सबसे छोटी उंगली का इस्तेमाल तांत्रिक क्रियाओं में किया जाता है। इसलिए इस उंगली से किसी व्यक्ति विशेष को तिलक नहीं लगाया जाता।



तिलक लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

1. तिलक लगाते समय हाथ को सिर के पीछे रखें
जब भी तिलक लगाएं तो बायां हाथ सिर के ऊपर या पीछे होना चाहिए, ताकि उस समय कोई नकारात्मक बात मन में न आए। साथ ही जब भी खुद को तिलक लगाएं तो अनामिका या अंगूठे से लगाएं। क्योंकि अंगूठा शुक्र से संबंधित होता है, जिसे धन, समृद्धि का कारक ग्रह माना जाता है।

2. उत्तर या पूर्व दिशा में खड़े होकर तिलक लगाएं
दिशा का व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। जब भी तिलक लगाएं तो उत्तर या पूर्व दिशा में खड़े होकर ही लगाएं, अन्यथा शुभ फल नहीं मिलेंगे। इसका जीवन पर अशुभ प्रभाव पड़ सकता है।

3. तिलक लगाते समय मंत्रों का जाप करें
तिलक लगाते समय एक मंत्र का जाप अवश्य करें, वह मंत्र है “ॐ चन्दनस्य महात्पुण्यं पवित्रं पापनाशनं आपदां हरते नित्यं, लक्ष्मी तिष्ठति सर्वदा।”

4. तिलक लगाने के बाद तामसिक भोजन न करें
तिलक लगाने के बाद तामसिक भोजन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो पूरे दिन का पुण्य नष्ट हो जाएगा और परेशानियां बढ़ेंगी।
 

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