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Solah Somwar Vrat: किस विधि से करें सोलह सोमवार का व्रत जानिए विधि

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Mon, 17 Jun 2024 05:06 AM IST
सार

Solah Somwar Vrat:16 सोमवार का व्रत वैवाहिक जीवन की खुशहाली और मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए किया जाता है। मान्यता है कि अगर 16 सोमवार का व्रत श्रावण मास से शुरू किया जाए तो और भी फलदायी होता है।

सोलह सोमवार व्रत
सोलह सोमवार व्रत- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Solah Somwar Vrat:16 सोमवार का व्रत वैवाहिक जीवन की खुशहाली और मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए किया जाता है। मान्यता है कि अगर 16 सोमवार का व्रत श्रावण मास से शुरू किया जाए तो और भी फलदायी होता है। पौराणिक मान्यताओं में कहा जाता है कि 16 सोमवार का व्रत सबसे पहले माता पार्वती ने स्वयं शुरू किया था और अपनी कठोर तपस्या और व्रत के शुभ प्रभाव से उन्हें भगवान शिव पति के रूप में मिले थे। आज हम आपको इस व्रत को करने के लाभ और व्रत की विधि बताने जा रहे हैं।
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16 सोमवार के व्रत के लिए पूजन सामग्री

भगवान शिव की मूर्ति, भांग, बेलपत्र, जल, धूप, दीप, गंगाजल, धतूरा, इत्र, सफेद चंदन, रोली, अष्टगंध, सफेद कपड़ा, नैवेद्य जो आधा किलो गेहूं के आटे को घी में भूनकर उसमें गुड़ मिलाकर बनाया जाता है।

कैसे लें 16 सोमवार  व्रत का संकल्प 

किसी भी पूजा या व्रत को शुरू करने के लिए सबसे पहले संकल्प लेना चाहिए। व्रत के पहले दिन संकल्प लिया जाता है। उसके बाद आपको नियमित पूजा और व्रत करना चाहिए। सबसे पहले हाथ में जल, अक्षत, पान, सुपारी और कुछ सिक्के लेकर संकल्प लें। भगवान शिव की मूर्ति के सामने सभी वस्तुएं समर्पित करें।
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सोलह सोमवार व्रत पूजा विधि


सूर्योदय से पहले पानी में काले तिल डालकर स्नान करें। साफ कपड़े पहनें और फिर भगवान शिव के सामने 16 सोमवार व्रत का संकल्प लें।

व्रत का संकल्प लेने के लिए हाथ में पान, सुपारी, जल, अक्षत और कुछ सिक्के लेकर भगवान शिव के इस मंत्र का जाप करें। ॐ शिवशंकरमीशानं द्वादशारधाम त्रिलोचनं। उमासाहितं देवं शिवं आवाहयाम्यहम्॥

16 सोमवार की पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है। अगर आप घर पर पूजा कर रहे हैं तो शिवलिंग को तांबे के बर्तन में रखें और गंगाजल में गाय का दूध मिलाकर अभिषेक करें। षडोपचार विधि से भगवान शिव की पूजा करें।

ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और भगवान भोलेनाथ को पंचामृत अर्पित करें। उन्हें सफेद चंदन लगाएं। भगवान शिव और माता पार्वती को सोलह सोमवार की बताई गई वस्तुएं अर्पित करें।

पूजा के दौरान महामृत्युंजय मंत्र, शिव चालीसा का पाठ करें। धूप-दीप जलाएं और सोमवार व्रत की कथा पढ़ें।

सोलह सोमवार की पूजा में भगवान शिव को चूरमा का भोग लगाना चाहिए। इसके लिए आधा किलो गेहूं के आटे से चूरमा बनाएं और उसमें घी और गुड़ मिलाकर भगवान शिव को भोग लगाएं। प्रसाद के रूप में खीर भी चढ़ाई जा सकती है।

परिवार के साथ शंकर जी की आरती करें। सभी को प्रसाद बांटने के बाद खुद भी ग्रहण करें। ध्यान रखें कि प्रसाद हर सोमवार को एक ही समय और उसी स्थान पर ग्रहण करना चाहिए जहां पर पूजा की गई हो।

सोलह सोमवार व्रत के नियम


सोलह सोमवार का व्रत श्रावण के साथ चैत्र, मार्गशीर्ष और वैशाख माह के पहले सोमवार से शुरू किया जा सकता है। सोलह सोमवार की पूजा दिन के तीसरे प्रहर में करीब 4 बजे से शुरू करनी चाहिए। पूजा सूर्यास्त से पहले पूरी कर लेनी चाहिए, इस तरह से की गई पूजा फलदायी मानी जाती है।

इस व्रत को हर आयु और वर्ग के लोग कर सकते हैं, लेकिन कठिन नियमों के कारण सोलह सोमवार का व्रत केवल सामर्थ्य रखने वालों को ही करना चाहिए। जब तक सभी 16 सोमवार व्रत पूरे न हो जाएं, तब तक मांसाहारी भोजन का सेवन नहीं किया जाता है।
16 सोमवार व्रत को बहुत कठिन माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, संतान प्राप्ति के लिए और अविवाहित महिलाएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए 16 सोमवार व्रत रखती हैं। 16 सोमवार व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य नियमों का पालन करना चाहिए।
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