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Shani Ki Sade Sati: क्या होती है शनि की साढ़ेसाती? जानिए इसका व्यक्ति के जीवन पर कैसा होता है असर!

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Sat, 22 Jun 2024 02:34 PM IST
सार

Shani Sade Sati: शनि और उसकी साढ़ेसाती से लोग हमेशा डरते रहते हैं। सभी ग्रहों में शनि का विशेष महत्व है। शनि की साढ़ेसाती सभी राशियों के लोगों पर गुजरती है। शनि की साढ़ेसाती लोगों के मन में डर पैदा करती है।

Shani Dev
Shani Dev- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Shani Sade Sati: शनि और उसकी साढ़ेसाती से लोग हमेशा डरते रहते हैं। सभी ग्रहों में शनि का विशेष महत्व है। शनि की साढ़ेसाती सभी राशियों के लोगों पर गुजरती है। शनि की साढ़ेसाती लोगों के मन में डर पैदा करती है। शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है, इसलिए इसका प्रभाव अलग-अलग राशियों के लोगों पर लंबे समय तक रहता है। शनि देव न केवल बुरे परिणाम देते हैं, बल्कि अगर उनका शुभ प्रभाव हो तो लोगों के जीवन में लंबे समय तक सुख, समृद्धि और धन बना रहता है। शास्त्रों में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफलदाता माना जाता है। शनि की धीमी चाल के कारण इसका प्रभाव लंबे समय तक धीमा रहता है। आइए जानते हैं शनि की साढ़ेसाती क्या होती है और यह व्यक्ति के जीवन में कैसे काम करती है।

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क्या होती है शनि की साढ़ेसाती  What is Shani's Sadhesati

शनि की साढ़ेसाती, जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, पूरे साढ़े सात साल तक शनि का प्रभाव होता है। शनि एक राशि में करीब ढाई साल तक रहते हैं और फिर दूसरी राशि में गोचर कर जाते हैं। इस तरह से देखा जाए तो साढ़ेसाती का प्रभाव व्यक्ति के पूरे जीवन में 3 बार आता है, अगर व्यक्ति का जीवनकाल औसत भी है तो भी व्यक्ति को शनि की साढ़ेसाती के दौर से दो बार गुजरना पड़ता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कुल 12 राशियां होती हैं और शनि एक राशि में ढाई साल रहने के बाद ही दूसरी राशि में जाते हैं। इस तरह से अगर किसी राशि पर एक बार साढ़ेसाती आती है तो वह दोबारा 30 साल बाद ही आती है।

साढ़ेसाती एक राशि पर तीन चरणों से होकर गुजरती है। जिसमें पहला, दूसरा और तीसरा चरण शामिल है। साढ़ेसाती के पहले चरण को आरंभिक साढ़ेसाती कहते हैं। साढ़ेसाती के दूसरे चरण को साढ़ेसाती का चरम काल और साढ़ेसाती के तीसरे चरण को उतरती साढ़ेसाती कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साढ़ेसाती का प्रत्येक चरण ढाई वर्ष का होता है। इस तरह साढ़ेसाती समाप्त होने में पूरे साढ़े सात वर्ष का समय लगता है।
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साढ़ेसाती का पहला चरण
साढ़े साती का पहला चरण बहुत कष्टकारी माना जाता है। जब शनि देव राशि परिवर्तन करते हुए किसी व्यक्ति की जन्म राशि से पहले वाली राशि में होते हैं तो उसे साढ़ेसाती का पहला चरण कहते हैं।

साढ़ेसाती का दूसरा चरण
जब शनि देव किसी व्यक्ति की राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे साढ़ेसाती का दूसरा चरण कहते हैं।

साढ़ेसाती का तीसरा चरण
जब शनिदेव किसी व्यक्ति की जन्म राशि को छोड़कर अगली राशि में पहुँचते हैं, तो उसे साढ़ेसाती का अंतिम चरण कहा जाता है।

साढ़ेसाती का क्या प्रभाव पड़ता है What is the effect of Sadesati

लोगों का मानना है कि यह हमेशा बुरा फल देती है. परंतु ऐसा बिल्कुल भी आवश्यक नहीं है. सबसे पहले देखना होगा कि आपकी व्यक्तिगत दशा क्या है. इसके बाद कुंडली  में शनि की स्थिति देखनी होगी. तब जाकर यह समझा जा सकता है कि साढ़ेसाती या ढैय्या का फल बुरा होगा या अच्छा होगा.

साढ़ेसाती का व्यक्ति के जीवन पर कैसा असर? What effect does Sade Sati have on a person's life?

अगर यह शुभ परिणाम दे तो करियर में सफलता मिलती है. व्यक्ति को आकस्मिक रूप से धन और उच्च पद मिल जाता है. साथ ही व्यक्ति को विदेश से लाभ होता है और विदेश यात्रा के योग बन जाते हैं. अगर साढ़ेसाती अशुभ परिणाम दे तो रोजगा के रास्ते बंद हो जाते हैं. स्वास्थ्य की जटील समस्याएं हो हो जाती हैं. कभी कभी दुर्घटनाओं तथा अपयश की स्थिति आ जाती है. साढ़ेसाती सबसे ज्यादा मानसिक स्थिति पर नकारात्मक असर डालती है. 

साल 2024 में है इन राशियों पर है शनि की साढ़ेसाती These zodiac signs are under the influence of Saturn

साल 2024 में शनि के कुंभ राशि में रहने के कारण मकर, कुंभ और मीन राशि वालों के ऊपर शनि की साढ़ेसाती है। मकर राशि वालों पर शनि की साढे़साती का आखिरी चरण चल रहा है। कुंभ राशि पर दूसरा चरण और मीन राशि वालों पर साढ़ेसाती का पहला चरण जारी है। 

शनि साढ़ेसाती के उपाय Remedies for Shani Sadesati

1. शनि देव कर्मों के अनुसार फल देते हैं। दान करना पुण्य कर्म माना जाता है, इसलिए शनिवार को लोहा, काली उड़द की दाल, काले तिल या काला कपड़ा दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।

2. शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और शनि स्तोत्र का पाठ करें। इससे भी शनि देव प्रसन्न होते हैं।

3. शनिवार को शनि देव के मंदिर में जाकर काले तिल और लोहे की कील मिलाकर सरसों का तेल शनि देव को अर्पित करें।

4. हनुमान जी की पूजा करने, हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनि देव की शांति होती है और अशुभ फल कम होते हैं।

5. शनिवार को मछलियों, पक्षियों और जानवरों को खाना खिलाने से शनि का प्रभाव कम होता है।

6. अगर आप प्रतिदिन अपनी क्षमता के अनुसार असहाय और गरीब लोगों को दान करते हैं, तो भी शनि देव शांत होते हैं।

7. हर सुबह पक्षियों को दाना और पानी दें।

8. चींटियों को आटा और चीनी भी दे सकते हैं।
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