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Shani Dev Ki Mahima: कैसे किया राजा विक्रमादित्य ने शनिदेव को प्रसन्न

जीवांजलि डेस्क Published by: सुप्रिया शर्मा Updated Sat, 15 Jun 2024 06:00 AM IST
सार

शनिवार के दिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।यदि आप शनिवार का व्रत रख रहे हैं, तो सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें और फिर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन केवल सात्विक भोजन का सेवन करें।
 

शनिवार व्रत की कथा
शनिवार व्रत की कथा- फोटो : jeevanjali

विस्तार

शनिवार, शनिदेव का दिन माना जाता है। शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, और यह माना जाता है कि वे हमारे जीवन में होने वाली सभी अच्छे और बुरे कर्मों का फल देते हैं। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार का दिन पूजा के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
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राजा विक्रमादित्य और शनिदेव की प्रसन्नता

कथा:

एक समय की बात है, उज्जैन में राजा विक्रमादित्य शासन करते थे। वे अपनी प्रजा के लिए न्यायप्रिय और दयालु राजा थे।  लेकिन, शनि की साढ़े साती के कारण उन्हें कई तरह के कष्टों का सामना करना पड़ा।  राज्य में अकाल पड़ा, धन-दौलत चली गई, और उनकी सेना पराजित हो गई।एक ऋषि ने राजा विक्रमादित्य को शनिदेव की पूजा करने का  उपाय बताया।  राजा विक्रमादित्य ने शनिवार का व्रत रखा और नियमित रूप से शनिदेव की पूजा की।  कई वर्षों तक उन्होंने यह व्रत निष्ठा से  किया।शनिदेव  राजा विक्रमादित्य की भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्होंने  उनके सभी कष्ट दूर कर दिए।  राज्य में फिर से सुख-समृद्धि लौट आई।  राजा विक्रमादित्य ने  शनिदेव की कृपा से  अपनी खोई हुई शक्ति और वैभव प्राप्त कर लिया।

कथा का सार:

यह कथा हमें सिखाती है कि शनिदेव की पूजा और  उनके प्रति भक्ति  कष्टों से मुक्ति दिला सकती है।  यदि  हम  पूर्ण श्रद्धा और  विश्वास  के साथ  शनिदेव  की पूजा करें  तो वे  हमारी  सभी  मनोकामनाएं  पूरी  करते  हैं।
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शनिवार व्रत:

शनिवार का व्रत शनिदेव को प्रसन्न करने का एक उत्तम  उपाय है।  इस व्रत में  सुबह जल्दी उठकर  स्नान करें,  फिर  घर  की  सफाई  करें  और  पूजा  स्थान  स्थापित  करें।  शनिदेव  की  प्रतिमा  या  मूर्ति  की  स्थापना  करें  और  उन्हें  दीप,  धूप,  फूल,  फल,  और  नैवेद्य  अर्पित  करें।  "ॐ शनिदेवाय नमः" मंत्र का  108  बार  जाप  करें  और  शनिदेव  से  अपनी  मनोकामना  प्रार्थना  करें।  दोपहर में  सात्विक  भोजन  ग्रहण  करें  और  शाम  को  आरती  उतारें।

शनिवार व्रत विधि:

स्नान और स्वच्छता: शनिवार सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान की स्थापना: पूजा स्थान को स्वच्छ करें और शनिदेव की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें।
दीप प्रज्वलन: दीपक जलाएं और धूप जलाएं।
शनिदेव को स्नान: पंचामृत से शनिदेव की प्रतिमा को स्नान कराएं।
वस्त्र अर्पण: शनिदेव को काले वस्त्र अर्पित करें।
तिल अर्पण: शनिदेव को काले तिल अर्पित करें।
सरसों का तेल: शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें।
नैवेद्य: शनिदेव को फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
मंत्र जाप: "ॐ शनिदेवाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
आरती: शनिदेव की आरती गाएं।
प्रार्थना: शनिदेव से अपनी मनोकामना प्रार्थना करें।
भोजन: दोपहर में सात्विक भोजन ग्रहण करें।
दान: शनिदेव को दान-पुण्य करें।

शनिवार पूजा के लाभ:

शनिदेव की कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। ग्रहों की अशुभता दूर होती है। नौकरी और व्यापार में तरक्की मिलती है। धन-दौलत में वृद्धि होती है।
स्वास्थ्य अच्छा रहता है। मानसिक शांति मिलती है।
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