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Sawan Special: आखिर क्यों होती है शिव की पूजा लिंग रूप में ? जानिए रहस्य

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Sat, 29 Jun 2024 07:00 AM IST
सार

Sawan Special: भगवान् शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद पवित्र माह होता है। इस पूरे महीनें शिव की सेवा करने से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती है।

Sawan Special
Sawan Special- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Sawan Special: भगवान् शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद पवित्र माह होता है। इस पूरे महीनें शिव की सेवा करने से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती है। इस बार सावन की शुरुआत और अंत दोनों सोमवार को हो रहा है इसलिए कुल 5 व्रत आएंगे। सावन 22 जुलाई सोमवार से शुरू होकर 19 अगस्त सोमवार को ही पूर्ण होने जा रहा है। आज इस लेख में हम आपको भगवान् शिव से जुड़ा एक और रहस्य बताने जा रहे है। क्या आपने कभी सोचा है कि शिव की पूजा लिंग रूप में क्यों होती है ? बाकी देवताओ के साथ तो ऐसा नहीं होता है।
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दरअसल, यही प्रश्न सनत्कुमार ने मंदराचल पर्वत पर शिव के वाहन नंदी से पूछा था कि शिवलिंग और मूर्ति रूप से पूजा का राज़ आखिर क्या है ?इसके जवाब में नन्दिकेशवर कहते है कि हे सनत्कुमार, आपके इस प्रश्न का हम जैसे लोगों के द्वारा उत्तर नहीं दिया जा सकता है लेकिन चूँकि आप शिव भक्त है इसलिए इस गोपनीय विषय के बारे में मुझे जैसा शिव ने कहा है ठीक वही मैं आपको बतलाता हूं। 

हे ब्राह्मण देव, शिव के 2 रूप है , एक "सकल" और एक " निष्कल", दूसरे किसी भी देवता के ऐसे रूप नहीं है। पहले शिव अपने "स्तंभ" रूप से प्रकट गए है फिर " साक्षात्" रूप से प्रकट हुए। " ब्रह्मभाव" शिव का "निष्कल" रूप है और " महेश्वर भव "सकल रूप" है। ये दोनों सिद्धरूप है। शिव ही कलायुक्त और अकल दोनों स्वरुप में प्राप्त होते है।
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सबसे पहले शिव के "ब्रह्मरूप" का बोध करवाने के लिए " निष्कल" लिंग प्रकट हुआ है। उसे बाद साक्षात जगदीश्वर के रूप का बोध करवाने के लिए "सकल" रूप में प्रकट हुए। शिव का जो ईशत्व है वो मूर्ति रूप है और जो ब्रह्मरूप है वो शिवलिंग है। जो व्यक्ति अपने जीवनकाल में एक शिवलिंग की स्थापना करता है उसे समानता की प्राप्ति हो जाती है। अगर एक से अधिक शिवलिंग अपने जीवनकाल में स्थापित कर दे तो वो शिव के साथ एकत्व को प्राप्त होता है। शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग की तुलना में मूर्ति पूजन गौण कर्म है। इसलिए प्रधान शिवलिंग ही है। 

अगर किसी मंदिर में शिव की मूर्ति है लेकिन लिंग नहीं है तो वहां पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है। शिवलिंग शिव के निराकार स्वरुप का प्रतीक है। शिव से भिन्न जो दूसरे देवता है वो सकल ब्रह्म नहीं है इसलिए उनकी लिंग रूप में पूजा का विधान नहीं है।
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