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Sawan month 2024: धरती पर कहां है सबसे बड़ा शिवलिंग? खुद शिव ने बताया ये रहस्य!

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Sat, 29 Jun 2024 11:39 AM IST
सार

Sawan month 2024: भगवान् शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद पवित्र माह होता है। इस पूरे महीनें शिव की सेवा करने से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती है।

शिवलिंग
शिवलिंग- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Sawan month 2024: भगवान् शिव के भक्तों के लिए सावन का महीना बेहद पवित्र माह होता है। इस पूरे महीनें शिव की सेवा करने से शिव लोक की प्राप्ति हो जाती है। इस बार सावन की शुरुआत और अंत दोनों सोमवार को हो रहा है इसलिए कुल 5 व्रत आएंगे। सावन 22 जुलाई सोमवार से शुरू होकर 19 अगस्त सोमवार को ही पूर्ण होने जा रहा है। आज इस लेख में हम आपको शिव से जुड़े एक रहस्य के बारे में बताने जा रहे है। 
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शिव पुराण के अनुसार, एक बार "ब्रह्मा" और "विष्णु", भगवान् शंकर को प्रणाम करके उनके दाएं और बाएं भाग में खड़े हो गए। फिर उन्होंने महादेव जी को आसान देकर उनका "पुरुष वस्तुओं" से पूजन किया। यहां "पुरुष वस्तु" से अर्थ उन वस्तुओं से है जो दीर्घकाल तक अविकृतभाव से स्थिर रहती है और अल्पकाल तक टिकने वाली वस्तु "प्राकृत वस्तु " कहलाती है। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर शिव ने कहा, आज का दिन एक महान दिन है। तुम्हारे द्वारा जो मेरी पूजा हुई है उससे मैं प्रसन्न हुआ। इसी कारण यह दिन बेहद पवित्र और महान होगा, आज की यह तिथि "शिवरात्रि" के नाम से जानी जायेगी।

इस तिथि में जो मेरे लिंग ( ब्रह्मरूप ) और वेर ( सकल रूप) की पूजा करेगा वो पुरुष सृष्टि का पालन करने में समर्थ हो जाएगा। इसी संवाद के क्रम में शिव आगे बताते है कि " मार्गशीष माह" की पूर्णिमा/प्रतिपदा तिथि को जब आद्रा नक्षत्र था तब पहली बार वो " ज्योतिर्मय स्तम्भ " रूप में प्रकट हुए और इसी तिथि में शिव की स्थापना आदि का मंगल उत्सव होना चाहिए। जो पुरुष " मार्गशीष माह" की पूर्णिमा/प्रतिपदा तिथि को आद्रा नक्षत्र में मेरे दर्शन करता है उसे मैं मेरे पुत्र के समान स्नेह करता हूं। यदि दर्शन के साथ मेरा पूजन भी कर लिया जाए तो उसका फल वाणी द्वारा प्रकट नहीं किया जा सकता है।
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शिव आगे बताते है कि वहां मैं "लिंग रूप" में प्रकट होकर बहुत बड़ा हो गया था। इसलिए उस लिंग के कारण वह स्थान " लिंग स्थान " के नाम से प्रसिद्द हुआ। इस संसार के लोग इसका दर्शन और पूजन कर सके इसलिए यह अनादि और अनंत लिंग आगे चलकर छोटा हो जाएगा। यह "शिवलिंग" मनुष्य को सारे भोग प्राप्त करवाने वाला होगा। यह इस संसार के प्राणियों को जन्म और मरण से मुक्त कर देगा। अग्नि के पहाड़ जैसा जो यह शिवलिंग यहां प्रकट हुआ है इसे कारण यह स्थान "अरुणाचल प्रदेश" के नाम से जाना जाएगा। यहां अनेक प्रकार के बड़े बड़े तीर्थ प्रकट होंगे और इन स्थान में निवास करने से और मरने से प्राणियों को मोक्ष तक मिल सकेगा।
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