विज्ञापन
Home  dharm  sawan jal abhishek mantra know which mantras to chant while offering water to shivling

Sawan Jal Abhishek Mantra: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय किन मंत्रों का करें जाप? जानिए

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Tue, 09 Jul 2024 06:00 AM IST
सार

Sawan Jal Abhishek Mantra: सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय है इस महीने में भगवान शिव की पूजा और मां पार्वती की पूजा करने का विशेष महत्व है आपको बता दें कि इस महीने में शिव अभिषेक करने का भी बहुत अधिक महत्व है

सावन जल अभिषेक मंत्र
सावन जल अभिषेक मंत्र- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Sawan Jal Abhishek Mantra: सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय है इस महीने में भगवान शिव की पूजा और मां पार्वती की पूजा करने का विशेष महत्व है आपको बता दें कि इस महीने में शिव अभिषेक करने का भी बहुत अधिक महत्व है। ऐसा मान्यता है कि शिव का अभिषेक करने से भगवान शिव  बहुत प्रसन्न होते हैं और साथ ही  भक्तों की मनोकामनाएं पूरी  करते हैं और साधक के जीवन से सारे दुख-दूर करते हैं । अगर आप सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं तो इन मंत्रों का जाप करें आपको बहुत लाभ मिलेगा। चलिए आपको इन मंत्रों के बारे में बताते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

सावन शिवरात्रि 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त Sawan Shivratri 2024 Date and Shubh Muhurta

पंचांग के अनुसार सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 02 अगस्त को दोपहर 03:26 बजे शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 03 अगस्त को दोपहर 03:50 बजे होगा। ऐसे में सावन शिवरात्रि व्रत 2 अगस्त 2024, शुक्रवार को किया जाएगा।

विज्ञापन

 

शिवलिंग पर अभिषेक करते समय इन मंत्रों का करें जाप 


1- ॐ ह्रीं ह्रौं नम: शिवाय॥

ॐ पार्वतीपतये नम:॥

ॐ पशुपतये नम:॥

ॐ नम: शिवाय शुभं शुभं कुरू कुरू शिवाय नम: ॐ ॥

2- मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥

श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।

3- ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

4- ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

5-ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।

ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।

ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।

6-  ॐ नमः शिवाय।

 नमो नीलकण्ठाय।

ॐ पार्वतीपतये नमः।

ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।

ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा।

7- करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं ।
विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥

8 - ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात्।।



यह भी पढ़ें:-
Unluck Plants for Home: शुभ नहीं, बल्कि अशुभ माने जाते हैं ये पौधे ! घर में लगाने से आती है दरिद्रता
Garuda Purana : गरुण पुराण क्या है, क्यों किया जाता है इसका पाठ? जानिए
Panchmukhi Shiv: भगवान शिव के क्यों है पांच मुख? जानिए इन 5 मुख का रहस्य
विज्ञापन