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Belpatra Niyam: बिना बेलपत्र अधूरी मानी जाती है भगवान शिव की पूजा, जानिए बेलपत्र चढ़ाने के नियम

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Wed, 10 Jul 2024 08:10 AM IST
सार

Belpatra Niyam: शिव आराधना और उपासना का महापर्व सावन माह 22 जुलाई 2024 सोमवार से शुरू हो रहा है।

Belpatra Niyam
Belpatra Niyam- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Belpatra Niyam: शिव आराधना और उपासना का महापर्व सावन माह 22 जुलाई 2024 सोमवार से शुरू हो रहा है। सावन माह में भगवान शिव की पूजा करें और इस माह में पड़ने वाले सभी सोमवार को जो भी शिव भक्त सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं जल्द ही पूरी होती हैं। श्रावण मास भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है। सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने और भोलेनाथ की प्रिय चीजों का भोग लगाने से सभी तरह के कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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भगवान शिव को सावन के महीने में उनकी सबसे प्रिय चीज बेलपत्र जरूर अर्पित किया जाता है। बेलपत्र भगवान शिव को सबसे ज्यादा प्रिय होता है। शास्त्रों में शिवलिंग पर बेलपत्र को चढ़ाने के बारे में कई नियम बताए गए हैं जिसे हर एक शिव भक्त को जरूर मालूम होना चाहिए। आइए जानते हैं शिवलिंग पर कैसे बेलपत्र चढ़ाना चाहिए।

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के नियम

ऐसे बेलपत्र न चढ़ाएं

भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि वह कहीं से फटा हुआ न हो। भगवान शिव को बेलपत्र के केवल तीन पत्ते ही चढ़ाए जाते हैं।

कितनी संख्या में चढ़ाएं बेलपत्र

वैसे तो भगवान शिव सिर्फ एक लोटा जल और एक बेलपत्र चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते हैं, लेकिन सावन के महीने में बेलपत्र आसानी से मिल जाते हैं, इसलिए आप शिवलिंग पर 11, 21, 51 और 101 बेलपत्र चढ़ा सकते हैं।

बेलपत्र कैसे चढ़ाना चाहिए

भगवान शिव को बेलपत्र हमेशा पत्ते के पीछे वाले भाग यानी चिकने भाग से छूकर ही चढ़ाएं। बेलपत्र हमेशा अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की सहायता से ही चढ़ाएं। बीच वाले पत्ते को पकड़कर भगवान शिव को चढ़ाएं।

बेलपत्र कब तोड़ें

कुछ तिथियों पर बेलपत्र तोड़ना वर्जित होता है। जैसे चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या, संक्रांति और सोमवार को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसे में पूजा से एक दिन पहले बेलपत्र तोड़कर रख लिया जाता है। बेलपत्र कभी भी अशुद्ध नहीं होता। पहले से चढ़ाए गए बेलपत्र को धोकर दोबारा भी चढ़ाया जा सकता है। भगवान शिव को कभी भी केवल बेलपत्र न चढ़ाएं, बेलपत्र के साथ जल की धारा जरूर चढ़ाएं।
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