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Shiv Katha: वसन्त ऋतु का जन्म कैसे हुआ? ब्रह्म ने कामदेव को शिव के पास क्यों भेजा?

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Thu, 11 Jul 2024 07:00 AM IST
सार

Shiv Katha: एक बार ब्रह्म जी शिव की माया से मोह में पड़ गए और वो जहां दक्षराज मुनि उपस्थित थे वहां पहुँच गए। उसी स्थान पर कामदेव भी अपनी पत्नी के साथ बैठा हुआ था।

Shiv Katha
Shiv Katha- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Shiv Katha: एक बार ब्रह्म जी शिव की माया से मोह में पड़ गए और वो जहां दक्षराज मुनि उपस्थित थे वहां पहुँच गए। उसी स्थान पर कामदेव भी अपनी पत्नी के साथ बैठा हुआ था। उस वार्तालाप के समय ब्रह्मा जी शिव की माया से पूर्णतया मोहित थे। उन्होंने  दक्ष आदि पुत्रों को संबोधित करके कहा, ऐसा प्रयत्न करना चाहिए जिससे महादेव जी की किसी कामनीय कांति वाली स्त्री से विवाह करें। भगवान शिव को मोहित करने का भार रति सहित कामदेव को दिया गया। 
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कामदेव ने कहा, सुंदर स्त्री ही मेरा अस्त्र है, अतः शिव को मोहित करने के लिए किसी नारी की सृष्टि कीजिए। यह सुनकर ब्रह्मा जी ने अपनी सांस खींचना शुरू की। उस निश्वास से पुष्पों से विभूषित वसंत का प्रादुर्भाव हुआ। वसंत और मलयानिल- यह दोनों मदन की सहायक हुई। इनके साथ जाकर कामदेव ने शिव को मोहने की चेष्टा की लेकिन हर बार वो विफल हुआ।  जब वह निराश होकर लौट आया तब यह बात सुनकर ब्रह्मा जी को बड़ा दुःख हुआ। 
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मारगणों की उत्पत्ति

उस समय उनके मुख से जो निश्वास वायु चली उससे मारगणों की उत्पत्ति हुई। उन्हें मदन की सहायता के लिए आदेश देकर ब्रह्मा ने पुनः उन सब को शिव जी के पास भेजा। परंतु महान प्रयत्न करने पर भी वे भगवान शिव को मोह में नहीं डाल सके। काम सपरिवार लौट आया और ब्रह्म जी को प्रणाम करके अपने स्थान पर चला गया। उसके चले जाने ब्रह्मा जी ने मन ही मन सोचा कि निर्विकार तथा मन को वश में रखने वाले योगपरायण भगवान शंकर किसी स्त्री को अपनी सहधर्मिणी कैसे स्वीकार करेंगे? 
 

शिवा को प्रसन्न करने का उद्देश्य

इसलिए इस समस्या के निवारण के लिए उन्होंने श्री विष्णु को याद किया। जब उन्होंने होने मन की बात श्री विष्णु से कही तो उन्होंने कहा, यदि तुम्हारे मन में यह विचार हो कि शंकर पत्नी का पानीग्रहण करेंगे तो शिवा को प्रसन्न करने के उद्देश्य से शिव को स्मरण करते हुए उत्तम तपस्या करो। अपने उस मनोरथ को ह्रदय में रखते हुए देवी शिवा का ध्यान करो। वे देवेश्वरी यदि प्रसन्न हो जाए तो सारा कार्य सिद्ध कर देंगी। 

यदि शिवा सगुण रूप से अवतार ग्रहण करके लोक में किसी की पुत्री हो मानव शरीर ग्रहण करें तो वह निश्चय ही महादेव जी की पत्नी हो सकती हैं। ऐसा कहकर उन्होंने ब्रह्मा जी को आदेश दिया की वो दक्ष से तपस्या करके के लिए कहे।
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