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Rules of Chaturmas 2024: चातुर्मास में मान लिए ये 14 नियम, तो होगी हर मनोकामना पूरी

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Thu, 04 Jul 2024 06:37 PM IST
सार

Chaturmas vrat 2024: चातुर्मास अर्थात 4 माह की अवधि। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है। इस काल में वर्षा ऋतु रहती है।

Chaturmas vrat 2024
Chaturmas vrat 2024- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Chaturmas vrat 2024: चातुर्मास अर्थात 4 माह की अवधि। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ हो जाता है। इस काल में वर्षा ऋतु रहती है। चातुर्मास के काल को साधन, पूजा और व्रत के लिए उत्तम काल बताया गया है। 17 जुलाई को देवशयनी एकादशी रहेगी। इन 4 माह में यदि आपने सावधानियां रख ली तो आपकी सभी मनोकामना पूर्ण होगी। किसी भी प्रकार के रोग से ग्रस्त हैं तो आपको इन चार माह में नियमों का भी पालन करना होगा।

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चातुर्मास के नियम | Rules of Chaturmas:

1. दाढ़ी कटिंग : चातुर्मास के 4 माह बाल और दाढ़ी नहीं कटवाते हैं। यदि आप चार माह नहीं रख सकते हैं तो श्रावण मास में ही नियम का पालन करें।

2. मानसिक व्रत : इन चार माह में व्यर्थ वार्तालाप, झूठ बोलना, अनर्गल बातें, मनोरंजन के कार्य, क्रोध, ईर्ष्या, असत्य वचन, अभिमान आदि भावनात्मक विकारों आदि को त्याग देना चाहिए।

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3. यात्रा : उक्त चार माह में यदि व्रत धारण करके नियमों का पालन कर रहे हैं तो यात्रा नहीं करते हैं।

4. मांगलिक कार्य : चार माह में विवाह संस्कार, जातकर्म संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं।

5. व्रत : चातुर्मास में में दिन में एक समय की भोजन करते हैं और रात में फलाहार या फलों का जूस लेते हैं। यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं तो खास दिनों में पूर्णोपवास रखें। यदि आप बीमार हो जाएं तभी व्रत का त्याग कर सकते हैं।

6. मौन उपवास : यदि आप उपवास नहीं कर पा रहे हैं तो समय समय पर मौन रहकर लाभ उठा सकते हैं। इन चार माह साधक लोग मौन ही रहते हैं। मौन से मन की शक्ति बढ़ती है।

7. त्याज्य भोजन : चातुर्मास में तेल, दूध, शक्कर, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन या मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन नहीं किया जाता। श्रावण में पत्तेदार सब्जियां यथा पालक, साग इत्यादि, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में प्याज, लहसुन और उड़द की दाल, आदि का त्याग कर दिया जाता है।

8. फर्श पर शयन : चातुर्मास के दौरान फर्श पर सोना और सूर्योदय से पहले उठना बहुत शुभ माना जाता है। इस दौरान साधक लोग, फर्श या भूमि पर ही सोते हैं। आप चटाई का उपयोग कर सकते हैं।


 

9. ब्रह्मचर्य : चार माह ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से शक्ति का संचय होता है। ब्रह्मचर्य में इंद्रिय संयम के साथ ही मानसिक संयम भी जरूरी है।

10. स्नान : चातुर्मास में स्नान करने से रूप, तेज, बल, पवित्रता, आरोग्य, निर्लोभता, दु:स्वप्न का नाश, तप और मेधा ये दस गुणों की प्राप्ति होती है। अतएव लक्ष्मी, पुष्टि और आरोग्य की वृद्धि चाहते हैं तो उषाकाल में स्नान करें और हो सके तो नदी स्नान करें।

11. सोना-जागना : उषाकाल में उठते हैं और रात्रि में जल्दी सो जाते हैं। इससे शरीर की घड़ी में सुधार होता है। प्रतिदिन ध्यान, साधना या तप करते हैं। साधुजन योग, तप और साधना करते हैं आमजन भक्ति और ध्यान करते हैं।

12. ध्यान या पूजा : 10 मिनट का सुबह और शाम को ध्यान करें। नहीं तो विष्णु, लक्ष्मी, शिव, पार्वती, गणेश, पितृदेव, श्रीकृष्ण, राधा और रुक्मिणी जी की पूजा करें। आप चाहें तो अपने इष्टदेव की पूजा, ध्यान या जप कर सकते हैं।

13. सत्संग : इन चार माह में साधुओं के साथ सत्संग करने से जीवन में अपार लाभ मिलता है। सत्संग नहीं कर सकते हैं तो अन्य साधनों से साधुओं प्रवचन सुन सकते हैं।

13. दान : इन चार माहों में यथाशक्ति दान करते हैं। दान में आप चावल, अन्न, छाता, कंबल और धन का दान कर सकते हैं।

14. तर्पण : क्त चार माहों में पितरों के निमित्त नदी के तट पर विधिवत तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष से छुटकारा मिलता है।

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