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Rohini Vrat 2024: कैसे करें रोहिणी व्रत पर पूजा, जानिए पूजा विधि

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Tue, 25 Jun 2024 05:06 AM IST
सार

Rohini Vrat 2024:  जैन धर्म में रोहिणी व्रत का बहुत अधिक महत्व है। आपको बता दें कि रोहिणी व्रत का संबंध नक्षत्रों  से माना जाता है, ऐसी मान्यता है कि रोहिणी व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र पड़ता है।

रोहिणी व्रत 2024
रोहिणी व्रत 2024- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Rohini Vrat 2024:  जैन धर्म में रोहिणी व्रत का बहुत अधिक महत्व है। आपको बता दें कि रोहिणी व्रत का संबंध नक्षत्रों  से माना जाता है, ऐसी मान्यता है कि रोहिणी व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र पड़ता है। आपको बता दें कि इस व्रत को जैन समुदाय में बहुत खास माना जाता है। इस व्रत को लेकर जैन समुदाय में रोहिणी व्रत को लेकर बेहद उत्साह रहता है। चलिए आपको बताते हैं कि जुलाई महीने में रोहिणी व्रत कब रखा जाएगा  
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जुलाई महीने में कब है रोहिणी व्रत  July Maheene Mein Kab Hai Rohinee Vrat
 

पंचांग के मुताबिक जुलाई महीने में रोहिणी व्रत 3 जुलाई 2024 दिन बुधवार है। आपको बता दें कि रोहिणी व्रत 3 साल 5 साल या फिर 7 साल तक किया जाता है इसके बाद ही इस व्रत का उद्दापन किया जाता  है।  

कैसे करें रोहिणी व्रत के दिन पूजा  Kaise Karen Rohinee Vrat Ke Din Pooja

रोहिणी व्रत के दिन सुबह उठें और भगवान का ध्यान करें 
इसके बाद स्नान करें और साफ-सुथरें कपड़े पहने 
इसके बाद मंत्रों का जाप करते हुए सूर्यदेव को जल चढ़ाएं  
मंदिर को अच्छे से साफ करें-और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं 
चौकी पर वासुपूज्य भगवान की प्रतिमा स्थापित करें। 
और उन्हें फूलों का हार चढ़ाएं 
इसके बाद दीपक जलाएं और उनकी विधिपूर्वक आरती करें 
आरती करने के बाद घर की सुख शांति  के लिए कामना करें 
इस दिन रात में भूल से भी भोजन ना करें । 
अगर आपको कुछ खाना है तो सूर्यास्त से पहले ही खा लें 
इस दिन श्रद्धानुसार धन, अन्न और वस्त्र का गरीबों में दान करें 
 

वासुपूज्य भगवान की आरती  Vasupujya Bhagwan Aarti


ॐ जय वासुपूज्य स्वामी, प्रभु जय वासुपूज्य स्वामी।

पंचकल्याणक अधिपति स्वामी, तुम अन्तर्यामी ।।

चंपापुर नगरी भी स्वामी, धन्य हुई तुमसे।

जयरामा वसुपूज्य तुम्हारे स्वामी, मात पिता हरषे ।।

बालब्रह्मचारी बन स्वामी, महाव्रत को धारा।

प्रथम बालयति जग ने स्वामी, तुमको स्वीकारा ।।

गर्भ जन्म तप एवं स्वामी, केवल ज्ञान लिया।

चम्पापुर में तुमने स्वामी, पद निर्वाण लिया ।।

वासवगण से पूजित स्वामी, वासुपूज्य जिनवर।

बारहवें तीर्थंकर स्वामी, है तुम नाम अमर ।।

जो कोई तुमको सुमिरे प्रभु जी, सुख सम्पति पावे।

पूजन वंदन करके स्वामी, वंदित हो जावे ।।

ॐ जय वासुपूज्य स्वामी, प्रभु जय वासुपूज्य स्वामी।

पंचकल्याणक अधिपति स्वामी, तुम अन्तर्यामी ।।  

 
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