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Tungnath Temple: कैसे पहुंचें तुंगनाथ मंदिर, जानिए इस मंदिर की विशेषता

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Mon, 24 Jun 2024 07:08 AM IST
सार

Tungnath Temple: अगर आप भगवान शिव के भक्त हैं और उनके सभी मंदिरों के दर्शन करना चाहते हैं, तो आज हम आपको उनके एक ऐसे मंदिर से रूबरू करवाने जा रहे हैं। जहां आप शिव के दर्शन के साथ-साथ बर्फबारी का भी मजा ले सकते हैं।

तुंगनाथ मंदिर
तुंगनाथ मंदिर- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Tungnath Temple: अगर आप भगवान शिव के भक्त हैं और उनके सभी मंदिरों के दर्शन करना चाहते हैं, तो आज हम आपको उनके एक ऐसे मंदिर से रूबरू करवाने जा रहे हैं। जहां आप शिव के दर्शन के साथ-साथ बर्फबारी का भी मजा ले सकते हैं। इस मंदिर का नाम तुंगनाथ मंदिर है, जो महादेव के पंच केदारों में से एक है। यह मंदिर उत्तराखंड के गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में एक पहाड़ी पर बना है। आइए आपको मंदिर से जुड़ी कुछ और खास बातें बताते हैं

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तुंगनाथ मंदिर कहां है?Tunganaath Mandir Kahaan Hai?

भगवान शिव का प्राचीन तुंगनाथ मंदिर उत्तराखंड के गढ़वाल के रुद्रप्रयाग जिले में एक ऊंचे पहाड़ पर स्थित है। तुंगनाथ मंदिर महादेव के पंच केदारों में से एक है, जो चारों तरफ से बर्फ से ढका रहता है।

तुंगनाथ मंदिर का इतिहास Tunganaath Mandir Ka Itihaas

ऐसा माना जाता है कि तुंगनाथ मंदिर का निर्माण पांडवों ने भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए करवाया था। कहा जाता है कि कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार के कारण भगवान शिव पांडवों से नाराज थे, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए इस खूबसूरत जगह पर शिव शंभू का मंदिर बनवाया गया था।
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मां पार्वती ने की थी तपस्या

स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान शिव को पाने के लिए मां पार्वती ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। मंदिर से जुड़ी एक कहानी यह भी है कि भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद ब्रह्महत्या के श्राप से मुक्ति पाने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी। इसी वजह से इस स्थान को चंद्रशिला भी कहा जाता है।

तुंगनाथ मंदिर कब जाएं  Tunganaath Mandir Kab Jaye  

नवंबर के बाद इस स्थान पर बर्फबारी शुरू हो जाती है और मंदिर बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है। तुंगनाथ मंदिर जाने का सबसे उपयुक्त समय जुलाई-अगस्त है। इन महीनों में इस स्थान की खूबसूरती और बढ़ जाती है। चारों ओर हरियाली और रोडोडेंड्रोन के फूल देखे जा सकते हैं।

तुंगनाथ मंदिर की खासियत  Specialty of Tungnath Temple

प्राचीन मंदिर के अलावा तुंगनाथ जाने वाला रास्ता भी अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर है। यहां आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु खूबसूरती देखकर हैरान रह जाते हैं। 12 से 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह इलाका गढ़वाल की सबसे खास जगहों में से एक है।

कब  बंद रहता है मंदिर  Kab  Band Rahata Hai Mandir

भारी बर्फबारी के कारण यह मंदिर नवंबर से मार्च के बीच बंद रहता है। पर्यटक इस जगह को मिनी स्विट्जरलैंड कहने से नहीं चूकते। सर्दियों में, तुंगनाथ भगवान की पूजा उनके शीतकालीन गद्दी स्थल मकुमठ में छह महीने तक की जाती है।

कैसे पहुँचें तुंगनाथ मंदिर  Kaise Pahunchen Tunganaath Mandir


विमान से

चोपता का निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट देहरादून है, जो चोपता से लगभग 180 किमी दूर है।

ट्रेन से

चोपता का निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो चोपता से लगभग 165 किमी दूर है।

सड़क मार्ग से

तुंगनाथ मंदिर चोपता से 4 किमी की हल्की चढ़ाई पर है।
 

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