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Jagannath Temple: भगवान जगन्नाथ की मूर्ति क्यों है अधूरी? जानिए इसके पीछे का रहस्य

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Tue, 02 Jul 2024 08:00 AM IST
सार

Jagannath Puri Temple Facts: इस साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 07 जुलाई, रविवार से आयोजित की जाएगी। इस रथ यात्रा में देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। इस रथ यात्रा में रथ को कोई मशीन या जानवर नहीं बल्कि भक्त खींचते हैं। 

Jagannath Temple
Jagannath Temple- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Jagannath Puri Temple Facts: ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है। हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को जगन्नाथ मंदिर से भव्य रथ यात्रा निकलती है। इस साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 07 जुलाई, रविवार से आयोजित की जाएगी। इस रथ यात्रा में देश के कोने-कोने से लोग पहुंचते हैं। इस रथ यात्रा में रथ को कोई मशीन या जानवर नहीं बल्कि भक्त खींचते हैं। जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के रूप में भगवान कृष्ण विराजमान हैं। यहां उनके साथ उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा भी हैं, जिनकी मूर्तियां लकड़ी से बनी हैं और अभी भी अधूरी हैं। इन अधूरी मूर्तियों की पूजा की जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि जगन्नाथ मंदिर में ये मूर्तियां अधूरी क्यों रह गईं...
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भगवान जगन्नाथ की मूर्ति अधूरी क्यों है? Why Is The Idol Of Lord Jagannath Incomplete?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि राजा इंद्रद्युम्न पुरी में भगवान जगन्नाथ का मंदिर बनवा रहे थे। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बनाने का काम देव शिल्पी विश्वकर्मा को सौंपा। मूर्ति बनाने से पहले विश्वकर्मा जी ने राजा इंद्रद्युम्न के सामने शर्त रखी कि वे दरवाजा बंद करके मूर्ति बनाएंगे और मूर्तियां बनने तक कोई भी अंदर प्रवेश नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी कारणवश उससे पहले दरवाजा खुल गया तो वे मूर्ति बनाना बंद कर देंगे।

राजा ने भगवान विश्वकर्मा की शर्त मान ली और बंद दरवाजे के अंदर मूर्ति बनाने का काम शुरू हो गया, लेकिन राजा इंद्रद्युम्न यह जानना चाहते थे कि मूर्ति बन रही है या नहीं। यह जानने के लिए राजा रोज दरवाजे के बाहर खड़े होकर मूर्ति बनने की आवाज सुनते थे। एक दिन राजा को अंदर से कोई आवाज नहीं सुनाई दी तो उन्होंने सोचा कि विश्वकर्मा काम छोड़कर चले गए हैं। इसके बाद राजा ने दरवाजा खोल दिया।
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इससे क्रोधित होकर भगवान विश्वकर्मा वहां से अंतर्ध्यान हो गए और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां अधूरी ही रह गईं। उस दिन से लेकर आज तक मूर्तियां इसी रूप में यहां मौजूद हैं और आज भी इसी रूप में उनकी पूजा की जाती है।

हालांकि हिंदू धर्म में खंडित या अधूरी मूर्ति की पूजा करना अशुभ माना जाता है, लेकिन जगन्नाथ धाम की मूर्तियां अधूरी हैं। इसके बावजूद यहां पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि तीनों देवताओं में आस्था और विश्वास से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
 
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