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History Of Jhandewalan Mandir: जानिए कैसे पड़ा इस मंदिर का नाम और क्या है इसका ऐतिहासिक महत्व

जीवांजलि धर्म डेस्क Published by: निधि Updated Thu, 20 Jun 2024 03:46 PM IST
सार

History Of Jhandewalan Mandir: दिल्ली के करोल बाग के पास एक प्राचीन मंदिर है, झंडेवाला मंदिर। यह मंदिर दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कॉनॉट प्लेस से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

History Of Jhandewalan Mandi
History Of Jhandewalan Mandi- फोटो : jeevanjali

विस्तार

History Of Jhandewalan Mandir: दिल्ली के करोल बाग के पास एक प्राचीन मंदिर है, झंडेवाला मंदिर। यह मंदिर दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कॉनॉट प्लेस से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। झंडेवाला मंदिर जिस इलाके में स्थित है, वह झंडेवाला के नाम से मशहूर हो गया है। यह न केवल दिल्लीवासियों के बीच बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच भी प्रसिद्ध है। झंडेवाला मंदिर झंडेवाली देवी को समर्पित एक सिद्धपीठ है। इस मंदिर का न केवल धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक महत्व भी है।
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इसका नाम झंडेवाला मंदिर क्यों पड़ा? Why was it named Jhandewalan Temple?

मंदिर के इतिहास की बात करें तो 100 साल से भी पहले दिल्ली के एक व्यापारी श्री बद्री भगत को सपने में देवी के दर्शन हुए और कहा कि इस बंजर भूमि में तुम्हें मेरी मूर्ति मिलेगी, जहां मेरी मूर्ति होगी, वहां एक झंडा होगा। जब बद्री भगत ने मूर्ति की खोज की तो उन्हें इस स्थान पर झंडे के नीचे देवी की मूर्ति मिली। तभी से उन्होंने यहां मूर्ति की स्थापना की और इस मंदिर का नाम झंडेवालान मंदिर पड़ा।

मंदिर परिसर में माता झंडेवाली के अलावा स्वयंभू शिवलिंग, हनुमान जी, गणेश जी और सरस्वती जी की मूर्तियां भी हैं। कहा जाता है कि जब भक्त बद्री भगत को देवी की मूर्ति मिली तो वह मूर्ति खंडित थी। आमतौर पर खंडित मूर्ति की स्थापना नहीं की जाती है लेकिन चूंकि यह स्वयंभू मूर्ति थी, इसलिए इसकी स्थापना की गई।



इस मंदिर में लोगों की इतनी आस्था है कि लोग सालों से यहां आ रहे हैं, चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, रास्ता नहीं बदलता। मन में हमेशा यह विश्वास बना रहता है कि देवी के दरबार में हर समस्या का समाधान है। इस मंदिर की मान्यता है कि जिसने भी यहां आकर कुछ मांगा है, उसे वह जरूर मिला है। मां अपने दर से कभी किसी को खाली हाथ नहीं जाने देती हैं। यहां लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। माता झंडेवाली के दिव्य दर्शन और आशीर्वाद के साथ ही भक्तों को छोले और हलवे का प्रसाद भी मिलता है।

मंदिर में संतोषी दरबार भी है जिसमें संतोषी माता, काली माता, वैष्णो माता, शीतला माता, लक्ष्मी माता, गणेश जी और हनुमान जी की मूर्तियाँ हैं। मुख्य मंदिर के बाहर एक नया शिवालय और काली मंदिर भी है। नवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में बहुत भीड़ होती है। यहाँ भक्तों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। भक्तों को दर्शन के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ता है लेकिन माता के प्रति उनकी श्रद्धा और भक्ति के कारण वे हर साल यहाँ आना बंद नहीं करते। भक्तों को यहाँ अपार शांति का अनुभव होता है।

झंडेवाला मंदिर के खुलने का समय (Jhandewalan Temple Opening Hours)

सर्दी में सुबह 5.30 बजे से रात के 9.30 बजे तक

गर्मी में सुबह 5.00 बजे से रात के 10.00 बजे तक

आरती का समय ग्रीष्मकालीन समय शीतकालीन समय

मंगला आरती का समय- 5.30 बजे सुबह 6.00 बजे

श्रृंगार आरती का समय- 9.00 बजे सुबह 9.00 बजे

भोग आरती का समय- 12.00 बजे दोपहर 12.00 बजे

संध्या आरती का समय- 8.00 बजे शाम 7.30 बजे

शयन आरती का समय- 10.00 बजे रात 9.30 बजे

नवरात्रि के दौरान, आरती केवल सुबह 4 बजे और शाम 7 बजे की जाती है।

(मंदिर रविवार, मंगलवार, हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी और प्रमुख त्यौहारों पर पूरे दिन खुला रहता है। अन्य दिनों में, मंदिर दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक बंद रहता है।)

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कैसे पहुंचे (How To Reach Jhandewala Temple)

- करोल बाग और कॉनॉट प्लेस के नजदीक होने के कारण यहां पहुंचना बहुत आसान है। आप यहां झंडेवालान मेट्रो स्टेशन से पैदल या ऑटो से पहुंच सकते हैं।

- नई दिल्ली स्टेशन भी नजदीक है। आप रेलवे स्टेशन से मेट्रो या ऑटो से यहां पहुंच सकते हैं।

- आप दिल्ली के लगभग सभी इलाकों से बस द्वारा भी यहां पहुंच सकते हैं।

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