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Ram Bhakta in Lanka: रावण की लंका में राम का भक्त कौन था?

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Fri, 28 Jun 2024 05:06 AM IST
सार

Ram Bhakta in Lanka: भगवान राम के तो वैसे अनन्य भक्त हैं लेकिन आज हम आपको भगवान राम के ऐसे एक अनन्य भक्त के बारें में बताएंगे जो रावण की लंका में था आप भी सोच रहे होंगे की शत्रु के घर में  भक्त कैसे हो सकता है

रावण की लंका में राम का भक्त कौन था?
रावण की लंका में राम का भक्त कौन था?- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Ram Bhakta in Lanka: भगवान राम के तो वैसे अनन्य भक्त हैं लेकिन आज हम आपको भगवान राम के ऐसे एक अनन्य भक्त के बारें में बताएंगे जो रावण की लंका में था आप भी सोच रहे होंगे की शत्रु के घर में  भक्त कैसे हो सकता है चलिए आपको  बताते हैं भगवान राम का वो अनन्य भक्त कौन था जिसने रावण को मारने में भगवान राम की मदद की थी 
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विभीषण कौन था Vibhishan Kaun Tha

घर का भेदी लंका ढाए, ये कहावत आपने भी सुनी होगी। और ये कहावत बहुत प्रचलित है। आपको बता दें कि इस कथा का अर्थ है कि अगर परिवार का कोई सदस्य परिवार का भेद बताकर उसके विनाश का कारण बनता है तो उसे घर का भेदी कहा जाता है। ये कहावत रावण के भाई विभीषण के बारे में कही गई है। क्योंकि विभीषण रावण का भाई होकर भगवान राम की मदद की थी और  उन्हें रावण की मृत्यु कैसे होगी इस बात का रहस्य बताया था। आपको बता दें कि विभीषण बेशक लंका में रहते थे लेकिन वो रामभक्त थे। आपको बता दें कि जब रावण माता का सीता का हरण करके लंका लेकर आया था तभी विभीषण ने रावण से कहा था कि पराई स्त्री का हरण करना महापाप है आप इन्हें सम्मान के साथ भगवान राम को लौटा दें लेकिन रावण ने विभीषण की एक ना सुनी और रावण ने विभीषण को लंका से निकाल दिया । जिसके बाद विभीषण भगवान राम की शरण में चले गए

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विभीषण ने भगवान राम को क्यों बताया रावण की मृत्यु का रहस्य Vibhishan Ne Bhagvan Ram Ko  Kyo Bataya Ravan Ki Mrityu Ka Rahasya 

आपको बता दें कि भगवान राम को  माता सीता को वापस लाना था जिसके लिए युद्ध करना जरूरी था लेकिन रावण को हराना इतना आसान नहीं था क्योंकि रावण ने ब्रम्हदेव से अमरता का वरदान मांगा था। ब्रम्हदेव ने  अमरता का वरदान तो रावण को नहीं दिया लेकिन उसकी नाभि में अमृत दे दिया था जिसके बाद रावण को मृत्यु का कोई भय नहीं था। जब भगवान राम और रावण के बीच युद्ध हुआ तब रावण को मारने के लिए भगवान राम ने कई दिव्यास्त्रों का उपयोग किया लेकिन उनके सारे वार खाली जा रहे थे तब विभीषण ने भगवान राम को रावण के नाभि पर प्रहार करने को कहा। विभीषण की बात मानते हुए भगवान राम ने रावण की नाभि पर प्रहार किया जिससे रावण की नाभि में ऱखा अमृत कलश टूट गया और रावण की मृत्यु हो गई । अपने भाई की मृत्यु का रहस्य बताकर विभीषण ने अपने सच्चे भक्त होे का परिचय दिया था 

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