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Deepak ka Bujhna: पूजा का दीपक बुझना क्यों माना जाता है अशुभ? जानिए ऐसा होने पर क्या करें

जीवांजलि Published by: निधि Updated Tue, 18 Jun 2024 05:14 PM IST
सार

Deepak ka Bujhna: सनातन धर्म में दीपक जलाना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। दीपक जलाने के कई फायदे हैं। इससे वातावरण में सकारात्मकता आती है।

Deepak ka Bujhna
Deepak ka Bujhna- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Deepak ka Bujhna: सनातन धर्म में दीपक जलाना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। दीपक जलाने के कई फायदे हैं। इससे वातावरण में सकारात्मकता आती है। यह जीवन से अंधकार को दूर कर प्रकाश लाने का भी प्रतीक है। इसके अलावा पूजा में दीपक अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। अलग-अलग अवसरों पर अलग-अलग तरह के दीपक जलाए जाते हैं। साथ ही इनकी संख्या भी अलग-अलग रखी जाती है। पूजा के दौरान और हर खास अवसर पर जलाए जाने वाले दीपक से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। जैसे दीपक जलाना शुभ होता है लेकिन पूजा के दौरान दीपक का बुझना अशुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि क्या वाकई पूजा में दीपक का बुझना अपशकुन का संकेत है।

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इस बात का इशारा है दीपक का बुझना 

 पूजा के दौरान दीया या दीपक का बुझना आमतौर पर अपशकुन माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अगर पूजा के दौरान दीपक बुझ जाए तो इसे देवी-देवताओं के नाराज होने का संकेत माना जाता है। यह भी माना जाता है कि इससे पूजा पूरी नहीं होती और उसका पूरा फल नहीं मिलता। ऐसी भी मान्यता है कि अगर पूजा के दौरान दीपक बुझ जाए तो मनोकामना पूर्ति में बाधा आती है। एक अन्य मान्यता के अनुसार दीपक का बुझना इस बात का संकेत है कि व्यक्ति सच्चे मन से भगवान की पूजा नहीं कर रहा है।
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कई वजहें हो सकती हैं दीपक बुझने 

हालांकि, दीपक बुझने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार हवा चलने या दीपक की बाती में किसी समस्या के कारण दीपक बुझ सकता है। अगर ऐसा हो तो भगवान से हाथ जोड़कर क्षमा मांग लें और फिर से दीपक जलाएं। बेहतर होगा कि दीपक जलाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें ताकि ऐसी घटना न हो। इसके लिए दीपक में पर्याप्त मात्रा में तेल या घी रखें। बाती को अच्छे से जलाएं। आरती या पूजा करते समय थोड़ी देर के लिए पंखा बंद कर दें। या फिर दीपक को हवा से बचाने के लिए उसके चारों ओर अवरोध बना दें, ताकि दीपक जलता रहे।

दीपक को दोबारा जलाते समय इस मंत्र का करें उच्चारण

ज्योतिष की मानें तो दीपक के बुझना अशुभ का प्रतीक है, लेकिन इसको दोबारा भी जलाया जा सकता है। ऐसे में सबसे पहले भगवान का ध्यान कर उनसे क्षमा मांग लें। उसके बाद यह एक मंत्र ‘आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥ मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन। यत्पूजितं मया देव! परिपूर्ण तदस्तु मे॥ का उच्चारण कर दीपक जला दें।

दीपक जलाने का महत्व

देवी-देवताओं की पूजा से लेकर हवन, पाठ या अन्य किसी भी अनुष्ठान में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। दीपक जलाने से न केवल जीवन का अंधकार दूर होता है, बल्कि घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा भी दूर होती है। शास्त्रों के अनुसार दीपक जलाने से जीवन की परेशानियां खत्म होती हैं। साथ ही वास्तु शास्त्र में भी माना जाता है कि दीपक जलाने से वास्तु दोष दूर होते हैं।

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