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Pitru Dosh: कुंडली में कैसे बनता है पितृदोष? जानिए लक्षण और उपाय

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Fri, 14 Jun 2024 05:06 AM IST
सार

Pitru Dosh: अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो उसे अपने जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पितृ दोष के कई कारण होते हैं, जिनमें से कुछ ये हैं। 

पितृ दोष
पितृ दोष- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Pitru Dosh: अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो उसे अपने जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पितृ दोष के कई कारण होते हैं, जिनमें से कुछ ये हैं। जैसे कि अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार विधि-विधान से नहीं किया जाता या उस व्यक्ति की असमय मृत्यु हो जाती है तो उस व्यक्ति से जुड़े परिवार को पितृ दोष का सामना करना पड़ता है। ऐसा सिर्फ एक पीढ़ी में नहीं होता बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। आइए जानते हैं पितृ दोष के लक्षण और उपाय।

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पितृ दोष के लक्षण


पितृ दोष के कारण व्यापार या नौकरी में किसी तरह का घाटा हो सकता है।

विवाह में किसी तरह की बाधा आ सकती है या विवाह के बाद बात तलाक तक पहुंच सकती है।

अगर कोई दंपत्ति कई उपाय करने के बाद भी संतान सुख से वंचित रह जाता है या पैदा होने वाला बच्चा मंदबुद्धि, विकलांग आदि होता है या बच्चा पैदा होते ही मर जाता है।

अगर घर में रहने वाले लोगों के बीच किसी न किसी बात पर वाद-विवाद होता रहता है तो इसका कारण पितृ दोष हो सकता है।

घर में मौजूद किसी सदस्य का बीमार होना।

पितृ दोष के कारण व्यक्ति को दुर्घटनाओं का भी सामना करना पड़ता है।

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पितृ दोष कैसे लगता है?

अगर मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार विधि-विधान से न किया जाए तो पितृ दोष लगता है।

असमय मृत्यु होने पर परिवार के सदस्यों को कई पीढ़ियों तक पितृ दोष का सामना करना पड़ता है।

माता-पिता का अपमान करना और उनकी मृत्यु के बाद परिवार के सदस्यों के लिए पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध न करने से पूरे परिवार पर पितृ दोष लगता है।

सांप को मारने से भी आपको पितृ दोष  लगता है 

पूर्वजों का श्राद्ध न करने से भी आपकी कुंडली में पितृदोष लगता है 

पीपल, नीम या बरगद के पेड़ को काटना भी आपकी कुंडली में पितृदोष बनाता है 

पितृ दोष के उपाय

पितृ पक्ष के दौरान विधि-विधान से पितरों का तर्पण और श्राद्ध करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें। साथ ही साल की हर एकादशी, चतुर्दशी, अमावस्या को पितरों को जल अर्पित करें और त्रिपंडी श्राद्ध करें।

पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रतिदिन दोपहर के समय पीपल के पेड़ की पूजा करें। पितरों को प्रसन्न करने के लिए पीपल के पेड़ के जल में काले तिल, दूध, चावल और फूल चढ़ाएं। पितृ दोष को शांत करने में यह उपाय बहुत कारगर है।

पितृ पक्ष के दौरान प्रतिदिन शाम को घर की दक्षिण दिशा में तेल का दीपक जलाएं। आप ऐसा रोजाना भी कर सकते हैं।

किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने, दान देने या किसी गरीब लड़की की शादी में मदद करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होने लगता है।

घर की दक्षिण दिशा में पितरों की तस्वीर लगाएं। उनसे प्रतिदिन अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें। कहा जाता है कि इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है।

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