Parivartini Ekadashi Puja: परिवर्तिनी एकादशी के मौके पर अगर आप भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो आपके लिए इन मंत्रों का जाप करना सबसे शुभ रहेगा। इससे जीवन की बाधाएं दूर होंगी और घर में खुशहाली बनी रहेगी।
Parivartini Ekadashi 2025 Mantra: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। वर्ष भर में 24 एकादशियां आती हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना अलग फल और महत्त्व बताया गया है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी या पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा गया। यह दिन पुण्य प्राप्ति, मन की शांति और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, जो भक्त इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। विशेष रूप से यह व्रत मानसिक तनाव, भय और नकारात्मक विचारों को दूर करने वाला माना गया है।
इस दिन मंत्र जाप का महत्व
व्रत और पूजा के साथ यदि भक्त भगवान विष्णु के पवित्र मंत्रों का जाप करे तो मन को गहरी शांति और आत्मिक बल मिलता है। मंत्र जाप से वातावरण शुद्ध होता है, मन स्थिर होता है और भक्ति की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
प्रमुख मंत्र और उनका फल
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
यह मंत्र भगवान विष्णु का सर्वाधिक प्रिय मंत्र माना जाता है। इसका जाप करने से मन की चंचलता दूर होती है और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। ॐ विष्णवे नमः
इस छोटे और सरल मंत्र का जाप करने से सभी कार्यों में सफलता मिलती है। घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्
यह विष्णु गायत्री मंत्र है। इसका नियमित जाप मन को पवित्र करता है और ज्ञान की वृद्धि करता है। ॐ श्रीधराय नमः
यह मंत्र भगवान के ‘श्रीधर’ स्वरूप का है। इससे जीवन में धन, वैभव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। ॐ पद्मनाभाय नमः
पद्मनाभ भगवान विष्णु का विशेष रूप है। इस मंत्र के जाप से मनुष्य के जीवन से भय और रोग दूर होते हैं।
जाप की विधि
परिवर्तिनी एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ।
तुलसी दल, पीले पुष्प और फल अर्पित करें।
मन को एकाग्र कर उपरोक्त मंत्रों का जाप करें।
संभव हो तो म से कम 108 बार (एक माला) मंत्र का जाप अवश्य करें।
ईश्वर के सान्निध्य का अवसर
परिवर्तिनी एकादशी केवल व्रत का दिन ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर के सान्निध्य का अवसर है। इस दिन मंत्र जाप करने से भक्त के हृदय में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में स्थिरता आती है। नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करने से न केवल मन को शांति मिलती है, बल्कि सांसारिक परेशानियाँ भी धीरे-धीरे दूर हो जाती हैं।