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Parikrama: क्यों की जाती है परिक्रमा, जानिए परिक्रमा करने के लाभ और तरीका

जीवांजलि धार्मिक डेस्क Published by: कोमल Updated Mon, 17 Jun 2024 05:06 PM IST
सार

Parikrama: परिक्रमा का हर धर्म में महत्व है। सनातन धर्म के महत्वपूर्ण वैदिक ग्रंथ ऋग्वेद में प्रदक्षिणा या परिक्रमा का उल्लेख मिलता है। परिक्रमा को पूजा-पाठ का अहम हिस्सा माना जाता है। मान्यता है कि भगवान की परिक्रमा करने से पापों का नाश होता है।

परिक्रमा
परिक्रमा- फोटो : jeevanjali

विस्तार

Parikrama: परिक्रमा का हर धर्म में महत्व है। सनातन धर्म के महत्वपूर्ण वैदिक ग्रंथ ऋग्वेद में प्रदक्षिणा या परिक्रमा का उल्लेख मिलता है। परिक्रमा को पूजा-पाठ का अहम हिस्सा माना जाता है। मान्यता है कि भगवान की परिक्रमा करने से पापों का नाश होता है। हिंदू धर्म में सिर्फ देवी-देवताओं की ही नहीं बल्कि पीपल, बरगद, तुलसी और अन्य शुभ प्रतीकात्मक वृक्षों के अलावा यज्ञ, नर्मदा, गंगा आदि की भी परिक्रमा की जाती है क्योंकि सनातन धर्म में प्रकृति को भी भगवान के बराबर माना गया है। आइए जानते हैं परिक्रमा करने के फायदे, परिक्रमा करने की सही दिशा और किस भगवान की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए।
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परिक्रमा करने के फायदे और सही तरीका


धार्मिक शास्त्रों के अनुसार मंदिर और भगवान की परिक्रमा करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है। और यह ऊर्जा व्यक्ति के साथ घर में आती है जिससे सुख-शांति बनी रहती है।

मंदिर में परिक्रमा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में करनी चाहिए। इससे भी हम समझ सकते हैं कि परिक्रमा हमेशा भगवान के दाहिने हाथ से शुरू करनी चाहिए।

परिक्रमा के दौरान अपने इष्ट देव का मंत्र जपने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। या आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं।

यानी कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च।

तानि स्वर्णि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे-पदे।


अर्थ - हमारे द्वारा जाने-अनजाने में किए गए तथा पिछले जन्मों के सभी पाप प्रदक्षिणा से नष्ट हो जाएं। सर्वशक्तिमान ईश्वर मुझे सद्बुद्धि प्रदान करें
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परिक्रमा के लिए संस्कृत शब्द प्रदक्षिणा है। इसे दो भागों (प्र+दक्षिणा) में बांटा गया है। प्र का अर्थ है आगे बढ़ना और दक्षिणा का अर्थ है दक्षिण की दिशा। अर्थात दक्षिण की ओर चलते हुए देवी-देवताओं की पूजा करना। परिक्रमा के दौरान भगवान हमारे दाहिनी ओर गर्भगृह में विराजमान होते हैं।

किस देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए


शिव जी - शिवलिंग की आधी परिक्रमा

विष्णु जी - पांच परिक्रमा

हनुमान जी - तीन परिक्रमा

दुर्गा जी (सभी देवी-देवता) - एक परिक्रमा

सूर्य देव - सात परिक्रमा

गणेश जी - तीन परिक्रमा

पीपल वृक्ष - 108 परिक्रमा


 

परिक्रमा कैसे करें

परिक्रमा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में करनी चाहिए। परिक्रमा दाएं हाथ की ओर से शुरू करें। मंदिर बहुत ही पवित्र स्थान है, यहां निरंतर मंत्रों का जाप, पूजा और घंटियों की ध्वनि से सकारात्मक ऊर्जा का एक चक्र बनता है। यह ऊर्जा उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है। ऐसे में दाहिनी ओर से परिक्रमा करने पर साधक को सकारात्मक ऊर्जा का लाभ मिलता है। इससे मानसिक तनाव दूर होता है, अध्यात्म की ज्योति जागृत होती है।

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