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Nirjala Ekadashi vrat katha: निर्जला एकादशी व्रत कथा? महत्त्व और पूजा विधि

जीवांजलि डेस्क Published by: सुप्रिया शर्मा Updated Mon, 17 Jun 2024 11:30 AM IST
सार

निर्जला एकादशी का व्रत रखने से शरीर और मन स्वस्थ रहता है।  लेकिन आप को बता दें की आप जो भी व्रत रखें उस व्रत की कथा जरूर सुने निर्जला एकादशी की भी व्रत कथा है जो भी व्यक्ति निर्जला एकादशी व्रत रखता है उसे ये कथा जरूर सुननी चाहिए

निर्जला एकादशी
निर्जला एकादशी- फोटो : jeevanjali

विस्तार

निर्जला एकादशी, जिसे भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है, सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है और भगवान विष्णु को समर्पित है। यह माना जाता है कि निर्जला एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भगवान विष्णु इस व्रत को रखने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। निर्जला एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति सांसारिक जीवन के बंधनों से मुक्त होता है। निर्जला एकादशी का व्रत रखने से मन पर नियंत्रण प्राप्त होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है। यह व्रत हमें इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करने और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होने में मदद करता है। निर्जला एकादशी का व्रत रखने से शरीर और मन स्वस्थ रहता है। यह व्रत पाचन क्रिया को मजबूत बनाने और रोगों से बचाने में मददगार होता है। लेकिन आप को बता दें की आप जो भी व्रत रखें उस व्रत की कथा जरूर सुने निर्जला एकादशी की भी व्रत कथा है जो भी व्यक्ति निर्जला एकादशी व्रत रखता है उसे ये कथा जरूर सुननी चाहिए 
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निर्जला एकादशी की कथा

कथा के अनुसार प्राचीन काल में, भद्रावती नामक एक नगर में अजय नामक एक राजा राज्य करता था। राजा अजय भगवान विष्णु के परम भक्त थे और हर एकादशी का व्रत रखते थे।एक वर्ष, ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन निर्जला एकादशी का व्रत आया। राजा अजय, सदैव की तरह, निर्जला एकादशी का व्रत रखने के लिए उत्सुक थे।उसी दिन, राजा को राज्य की रक्षा के लिए युद्ध में जाना पड़ा। युद्ध के दौरान, उन्हें भूख-प्यास का एहसास हुआ, परंतु उन्होंने व्रत का नियम नहीं तोड़ा।युद्ध में विजयी होने के बाद, राजा अजय घर लौटे और द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया।उसी रात, राजा अजय ने स्वप्न में भगवान विष्णु को देखा। भगवान विष्णु ने राजा अजय की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और कहा, "हे अजय! तुमने निर्जला एकादशी का व्रत विधिपूर्वक पूर्ण किया है। मैं तुम्हारी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हूं। तुम्हें मनचाहा वरदान प्राप्त होगा।" राजा अजय ने भगवान विष्णु से मोक्ष का वरदान मांगा। भगवान विष्णु ने राजा अजय को वरदान दिया और अंत में राजा अजय स्वर्गलोक चले गए।

कथा का सार:

यह कथा हमें सिखाती है कि निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी होता है। भगवान विष्णु इस व्रत को रखने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

निर्जला एकादशी के महत्व:

- निर्जला एकादशी सभी एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- इस व्रत को रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- निर्जला एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- इस व्रत को रखने से मन पर नियंत्रण प्राप्त होता है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

निर्जला एकादशी की पूजा विधि:

- निर्जला एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए।
- स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।
- भगवान विष्णु को फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करने चाहिए।
- व्रत के दिन दान-पुण्य करना चाहिए।
- रात्रि में भगवान विष्णु की कथाएं सुननी चाहिए।
- द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करना चाहिए।

निर्जला एकादशी के व्रत के नियम:

- निर्जला एकादशी के दिन जल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
- इस दिन अन्न, लवण, मसाले आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
- व्रत के दिन दिन में सोना नहीं चाहिए।
- क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य आदि से बचना चाहिए।
- सत्य बोलना चाहिए और असत्य से बचना चाहिए।
 
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